रेलवे में लाइनमैन की नौकरी करता था लंगूर बंदर, देता था ट्रेन को सिग्नल

रेलवे में लाइनमैन की नौकरी करता था लंगूर बंदर, देता था ट्रेन को सिग्नल

नई दिल्ली: बंदरों को इंसानों के पुर्वज माना जाता है। वहीं कहा जाता है कि अगर बंदरों को ठीक ढंग से ट्रेनिंग दी जाए तो वह इसानों की तरह काम कर सकते है। हालांकि आप लोगों ने कई बार अपने घर से बाहर और गलियों में बंदरों की खेल होते देखा होगा। जिसमें जिस तरह बंदर से कहा जाता है वह उसी तरह करता है। यानी उन बंदरों को अच्छे से टेनिंग दी जाती। ऐसे में एक लंगूर बंदर की खबरे सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि वह बंदर 140 साल पहले रेलवे में नौकरी किया करते थे।

दरअसल 1880 के दशक में जेम्स एडविन वाइड नाम का एक रेलवे सिग्नलमैन था। उन्होंने एक ट्रेन हादसे में अपने दोनों पैर खो दिए। जिसके बाद उन्होंने लड़की के नकली पैर लगवा लिए। लेकिन जिस तरह वह पहल काम किया करता था उस तरह उससे काम नहीं हो रहा था। जिसके बाद उन्होंने एक बंदर को लाने की सोची। दरअसल एक बार वह दक्षिण अफ्रीका के एक बाजार का दौरा कर रहा था, जब उसने देखा कि एक लंगूर बैलगाड़ी चला रहा था। जिसके बाद उसन सोचा कि उसे भी क बंदर की जरूर है जिससे वह काम करवा सकें।

उसके बाद मार्केट से वह एक बंदर खरीद कर लेकर आया जिसका नाम जैक रखा गया। वहीं जेम्स वाइड को मदद की जरूरत थी। वहीं लंगूर को अपना निजी सहायक बना लिया और उसे ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। टेनिंग के दौरान       सबसे पहले उसने जैक को प्रशिक्षित किया कि वह उसे एक छोटी ट्रॉली में लेकर आ-जा सके। जल्द ही जैक घर के कामों में, जैसे फर्श पर झाडू लगाने और कचरा बाहर निकालने में भी मदद करने लगा। लेकिन सिग्नल बॉक्स वह जगह है जहां जैक वास्तव में चमका। वहीं धीरे-धीरे वह सिग्नल स्टेशन ले जाने लगा। उसके बाद बंदर को स्टेशन का काम की टेनिंग दी गई। उसके बाद वह सभी कामों में निपुण हो गया।

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