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वेनेजुएला से तेल खरीद पर भारत का बयान, जानें अपना रुख साफ करते हुए क्या कहा?

वेनेजुएला से तेल खरीद पर भारत का बयान, जानें अपना रुख साफ करते हुए क्या कहा?

Venezuela Oil Purchase: भारत के Ministry of External Affairs (MEA) ने शुक्रवार, 20 फरवरी को इस बात का स्पष्ट जवाब दिया कि उसने 100 देशों के संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर कैसे किए हैं, जिसमें इजरायल के वेस्ट बैंक में एकतरफा कदमों की निंदा की गई है। भारत ने कहा है कि यह बयान एक “नेगोशिएटेड (बातचीत के बाद तैयार) दस्तावेज़” नहीं था और इस विषय पर देश की स्थिति पहले से ही स्पष्ट है।

संयुक्त बयान पर भारत का रुख

MEA के प्रवक्ता रणधीर जैस्वाल ने कहा कि संयुक्त बयान पर भारत का रुख पहले ही भारत-अरब लीग मंत्री स्तरीय बैठक के संयुक्त बयान में व्यक्त किया जा चुका है। उस बयान में दोनों पक्षों ने मध्य पूर्व में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्धता जताई थी, अंतरराष्ट्रीय कानून और महत्वपूर्ण UN प्रस्तावों के अनुसार। साथ ही 1967 की सीमाओं पर आधारित एक स्वतंत्र, संप्रभु और सक्षम फिलिस्तीन राज्य की भी बात कही गई थी।

भारत की औपचारिक डिप्लोमैटिक नीति नहीं

विदेश मंत्रालय ने ये भी बताया कि भारत संयुक्त राष्ट्र में 100 से ज्यादा देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ उस बयान पर सहमत हुआ, लेकिन यह स्वीकार किया कि वह बयान किसी बातचीत के बाद तैयार नहीं किया गया था और न ही भारत ने उसमें सामग्री को लिखने या फॉर्म करने में भूमिका निभाई। इसलिए इसे भारत की औपचारिक डिप्लोमैटिक नीति में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति के गाजा पीस प्लान

MEA ने यह भी पुष्टि की कि भारत ने वाशिंगटन DC में हुई ‘Board of Peace’ बैठक में ऑब्जर्वर के रूप में हिस्सा लिया था। भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति के गाजा पीस प्लान का स्वागत किया और यूएनएससी के रिज़ोल्यूशन 2803 के तहत चल रहे शांति प्रयासों का समर्थन किया। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि भारत की विदेश नीति पर फिलिस्तीन और इजरायल के मुद्दे पर पहले से स्पष्ट रुख रहा है।

भारत के बयान में कोई बदलाव नहीं

भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय कानून, संबंधित UN प्रस्तावों और अरब शांति पहल के अनुरूप एक न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान का समर्थन करता आया है। MEA ने यह बात भी दोहराई कि भारत का रुख तेल की आपूर्ति, रूस और वेनेजुएला से तेल खरीद, अफगानिस्तान या पाकिस्तान के साथ संबंध जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय विषयों पर पहले बयान किए गए रुख के समान ही है और उसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।

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