
New India Co-Operative Bank Scam: मुंबई के न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में 122करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया है। इस मामले में बैंक के तत्कालीन जनरल मैनेजर (GM) हितेश मेहता पर गंभीर आरोप लगे हैं। यह घोटाला तब उजागर हुआ जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंक के ऑडिट के दौरान बड़ी गड़बड़ी पाई।
12फरवरी को आरबीआई के अधिकारियों ने बैंक का ऑडिट किया, जिससे यह खुलासा हुआ। ऑडिट के दौरान बैंक के सुरक्षित लॉकर से भारी मात्रा में नकदी गायब मिली। इसके बाद आरबीआई ने बैंक पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी।
बैंक लॉकर से कैश गायब
शिकायतकर्ता के अनुसार, बैंक का मुख्य सुरक्षित लॉकर मुंबई के प्रभादेवी स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस की तीसरी मंज़िल पर था। ऑडिट के लिए पहुंचे आरबीआई अधिकारियों ने लॉकर की चाबियां बैंक के कर्मचारी अतुल म्हात्रे से लीं और नकदी की गिनती शुरू की। इसी दौरान न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक की गोरेगांव ब्रांच में भी ऑडिट चल रहा था। कुछ घंटों बाद अधिकारियों को पता चला कि लॉकर में दर्ज नकदी और मौजूद नकदी में बड़ा अंतर है। बैंक के लॉकर से 122करोड़ रुपये गायब थे, जबकि गोरेगांव ब्रांच में भी रकम कम मिली।
हितेश मेहता ने कुबूला गबन
आरबीआई अधिकारियों ने जब बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इस बीच हितेश मेहता ने अकेले में अधिकारियों से मुलाकात की और फिर अन्य बैंक अधिकारियों को बुलाया गया। इसके बाद हितेश मेहता ने स्वीकार किया कि उसने लॉकर से नकदी निकाली थी। जब उससे पूछा गया कि यह पैसा कहां गया, तो उसने बताया कि उसने इसे अपने कुछ परिचितों को दे दिया। साथ ही उसने यह भी कबूला कि कोविड-19महामारी के दौरान ही उसने लॉकर से पैसा निकालना शुरू कर दिया था।
ईओडब्ल्यू ने की गिरफ्तारी
पहले दादर पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी, लेकिन बाद में इसे आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दिया गया। शनिवार को ईओडब्ल्यू की टीम ने दहिसर में हितेश मेहता के घर पर छापा मारा और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब इस घोटाले की गहराई से जांच कर रही है ताकि पता लगाया जा सके कि गबन की गई 122करोड़ रुपये की राशि कहां गई और इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल है।
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