
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स-दिल्ली के ऊपर लगातार छठे दिन भी हैकर्स का कब्जा बना हुआ है। बता दे कि एम्स-दिल्ली के ऊपर हैकर्स ने 5 दिन पहले हमला किया था, तब से लेकर अब तक एम्स के कंप्यूटर पर उनका ही कबजा बना हुआ है। हैकर्स ने एम्स-दिल्ली से 200 करोड़ रुपये क्रिप्टोकरंसी में मांगे थे। इसके चक्कर में छठे दिन भी मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है।
सभी काम हो रहे है मैनुअली
एम्स में इमरजेंसी, आउटपेशेंट, इनपेशेंट, लैब इकाई को रजिस्टरों पर और मैनुअली देखा जा रहा है। लेकिन इस बात से एम्स प्रशासन मे साफ तौर पर मना किया है कि 200 करोड़ रुपये क्रिप्टोकरंसी मांगने की कोई बात नहीं हुई है। खबरों के अनुसार, कथित तौर पर 200करोड़ रुपये की फिरौती की मांग पर कोई और चर्चा नहीं हुई है और अस्पताल के अधिकारियों ने बैक-अप डेटा से काम करना शुरू कर दिया है। इस बीच, एनआईसी ई-हॉस्पिटल डेटाबेस और ई-हॉस्पिटल के लिए एप्लिकेशन सर्वर बहाल कर दिए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एनआईसी टीम एम्स में स्थित अन्य ई-हॉस्पिटल सर्वरों से संक्रमण को स्कैन और साफ कर रही है, जो अस्पताल सेवाओं के वितरण के लिए आवश्यक हैं।
ऐसे है देश की सुरक्षा को खतरा
आपको बता दे कि,एम्स में सामान्य लोगों से लेकर देश के टॉप VVIPतक का इलाज हुआ है।अगर उनकी केस हिस्ट्री भी डिजिटल रही है और वह साइबर हमलावरों के हाथ लगी है तो वे उस डेटा का किसी भी तरह से दुरुपयोग कर सकते है। बता दे कि, पूर्व राष्ट्रपतति रामनाथ कोविंद से लेकर पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह, कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी व केंद्रीय गृह मंत्र अमित शाह सहित कई बड़े VVIPAIIMSमें भर्ती रहे है। इनके अलावा केंद्रीय सुरक्ष बलों के अधिकारी और जवानों का इलाज भी एम्स में होता रहा है।
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