दहेज उत्पीड़न मामलों में कानून का हो रहा दुरुपयोग, अब सुप्रीम कोर्ट ने दे दी चेतावनी

दहेज उत्पीड़न मामलों में कानून का हो रहा दुरुपयोग, अब सुप्रीम कोर्ट ने दे दी चेतावनी

Supreme Court Warns On Misuse Of Dowry Harassment: अतुल सुभाष की आत्महत्या ने एक तरफ न्यायिक व्यवस्था की कलई खोल दी है। दरअसल बेंगलुरु के एआई इंजीनियर अतुल ने दहेज उत्पीड़न के झूठे मुकदमों से तंग आकर जान दे दी है। उन्होंने अपने 80 मिनट के वीडियो और 24 पन्नों के सुसाइड नोट में जज रीता कौशिक पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने अपनी पत्नी निकिता सिंघानिया पर पैसों के लिए दहेज उत्पीड़न का झूठा मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाए थे।

अब दहेज उत्पीड़न कानून के हो रहे दुरुपयोग का उच्चतम न्यायालय ने संज्ञान ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट में एक अलग मामले में महिलाओं द्वारा अपने पतियों के खिलाफ दर्ज कराए गए वैवाहिक विवाद के मामलों में क्रूरता कानून के दुरुपयोग के खिलाफ चेतावनी दी।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज उत्पीड़न के मामलों में कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए और पति के सगे-संबंधियों को फंसाने की प्रवृत्ति से बचाना चाहिए। जस्टिस बी.वी.नागरत्ना और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि वैवाहिक विवाद से उत्पन्न आपराधिक मामले में परिवार के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी को इंगित करने वाले विशिष्ट आरोपों के बिना उनके नाम का उल्लेख शुरू में ही रोक दिया जाना चाहिए।

पति के सभी परिजनों को फंसाने की प्रवृत्ति          

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि न्यायिक अनुभव से यह सत्य है कि वैवाहिक विवाद उत्पन्न होने की स्थिति में अक्सर पति के सभी परिजनों को फंसाने की प्रवृत्ति होती है। ठोस सबूतों या विशिष्ट आरोपों के बिना किसी पर आरोप नहीं लगा सकते। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को कानूनी प्रावधानों और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकने एवं परिवार के निर्दोष सदस्यों को अनावश्यक परेशानी से बचाने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।

वैवाहिक विवादों में उल्लेखनीय वृद्धि                   

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि  हाल के वर्षों में देश भर में वैवाहिक विवादों में वृद्धि हुई है। साथ ही विवाह के बाद कलह और तनाव भी बढ़ रहा है। जिसके परिणामस्वरूप, आईपीसी की धारा 498ए (पत्नी के खिलाफ पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) जैसे प्रावधानों का दुरुपयोग करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ताकि पत्नी द्वारा पति और उसके परिवार के खिलाफ झूठा मुकदमा किया जाए। न्यायालय ने कहा कि वैवाहिक विवादों के दौरान अस्पष्ट और सामान्य आरोपों की यदि जांच नहीं की जाती है, तो कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग होगा और पत्नी एवं उसके परिवार द्वारा दबाव डालने का मामला बढ़ेगा।

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