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इतिहास में एक बार लाल किले पर झंडा 16 अगस्त फहराया गया था,जानें क्या थी वजह

इतिहास में एक बार लाल किले पर झंडा 16 अगस्त फहराया गया था,जानें क्या थी वजह

नई दिल्लीभारत 15अगस्त, 2022को अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस दिन, देश के पहले प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश शाही ताज से भारत की स्वतंत्रता को चिह्नित करने के लिए लाल किले पर तिरंगा फहराया था। तब से, संबंधित प्रधानमंत्रियों के लिए झंडा फहराना और राष्ट्र को संबोधित करना एक परंपरा बन गई है। लाल किले की प्राचीर पर 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री द्वारा तिरंगा फहराना आज भले ही स्वतंत्रता दिवस का पर्याय है, लेकिन बहुत कम लोगों को यह बात मालूम होगी कि आजादी हासिल करने के बाद लाल किले पर पहली बार 15 अगस्त को नहीं, बल्कि 16 अगस्त 1947 को सुबह साढ़े आठ बजे राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था।

इतिहासकारों के अनुसार, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पहली बार 16 अगस्त 1947 को सुबह साढ़े आठ बजे लालकिले की प्राचीर पर ध्वजारोहण किया था। उस समय नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चलो दिल्ली के नारे और दिल्ली के लालकिले पर आजादी के ध्वज को फहराए जाने के अपने सपने का जिक्र किया था।भारतीय डाक विभाग द्वारा कई डाक संग्रहण प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका अदा कर चुके कोलकाता निवासी शेखर चक्रवर्ती ने अपने संस्मरणों फ्लैग्स एंड स्टैम्प्स में लिखा है कि 15 अगस्त 1947 के दिन वायसराइल लॉज (अब राष्ट्रपति भवन ) में जब नई सरकार को शपथ दिलाई जा रही थी, तो लॉज के सेंट्रल डोम पर सुबह साढ़े दस बजे आजाद भारत का राष्ट्रीय ध्वज पहली बार फहराया गया था।

उन्होंने बताया कि इससे पूर्व 14-15 अगस्त की रात को स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज कौंसिल हाउस के उपर फहराया गया, जिसे आज संसद भवन के रूप में जाना जाता है। इससे पहले 14 अगस्त 1947 की शाम को ही वायसराय हाउस के उपर से यूनियन जैक को उतार लिया गया था। इस यूनियन जैक को आज इंग्लैंड के हैम्पशायर में नार्मन ऐबी आफ रोमसी में देखा जा सकता है। 15 अगस्त 1947 को सुबह छह बजे की बात है। देश के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दिए जाने का कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में पहले समारोहपूर्वक यूनियन जैक को उतारा जाना था, लेकिन जब देश के अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटन ने पंडित नेहरू के साथ इस पर विचार विमर्श किया, तो उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि यह ऐसा दिन है जब हर कोई खुशी चाहता है, लेकिन यूनियन जैक को उतारे जाने से ब्रिटेन की भावनाओं के आहत होने के अंदेशे के चलते उन्होंने समारोह से इस कार्यक्रम को हटाने की बात कही।

भारतीय रिजर्व बैंक में करीब 35 साल तक विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभालने वाले आर सी मोदी ने अपने संस्मरणों इंडिपेंडेंस डे 1947 : दिल्ली ,में लिखा है कि इसी के चलते 15 अगस्त को दोपहर बाद राष्ट्रीय ध्वज को पहली बार सार्वजनिक रूप से सलामी दिए जाने का कार्यक्रम वार मैमोरियल आर्च (आज का इंडिया गेट) में आयोजित किया गया। जिस समय प्रधानमंत्री वहां झंडा फहरा रहे थे उसी समय साफ खुले आसमान में जाने कैसे इंद्रधनुष नजर आया और उसे देखकर वहां जमा भीड़ हतप्रभ रह गयी। इस घटना का जिक्र माउंटबेटन ने 16 अगस्त 1947 को लिखी अपनी 17वीं रिपोर्ट में भी किया है, जिसे उन्होंने ब्रिटिश क्राउन को सौंपा था। उन्होंने रिपोर्ट में इंद्रधनुष के रहस्यमय तरीके से उजागर होने का जिक्र किया। मोदी लिखते हैं कि 16 अगस्त की सुबह समाचारपत्रों की सबसे प्रमुख खबर यही थी कि पंडित नेहरू आज लालकिले की प्राचीर पर ध्वजारोहण करेंगे और राष्ट्र को संबोधित करेंगे।

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