Neha Bora Denied Signature:ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह और उनका छात्र संगठन दिल्ली पुलिस की ओर से मांगे गए पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। नेहा ने इस नोटिस को आगे भी चुनौती देने की बात कही है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया, जिसमें जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार देने को कहा गया था।
नेहा बोरा ने इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 23 अक्टूबर को अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद भी उन्होंने बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया।
‘संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन’
नेहा बोरा का कहना है कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करना उनके संवैधानिक अधिकारों को सीमित कर सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इस अधिकार को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि SEM के समक्ष होने वाली कार्यवाही में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन होना चाहिए।
नेहा के मुताबिक, वह संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होंगी और मामले में अपना पक्ष रखेंगी। उन्होंने नोटिस को आगे चुनौती देने की बात भी कही है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि नोटिस जारी करने के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पर्याप्त सामग्री मौजूद थी। हालांकि, अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि जांच के दौरान जिन दस्तावेजों और सामग्री पर भरोसा किया जाएगा, उन्हें नेहा बोरा को उपलब्ध कराया जाए।
अदालत ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि बॉन्ड जमा करने का आदेश देने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन न हो।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब मामले की अगली कार्रवाई स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष होनी है। नेहा बोरा ने बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करने और नोटिस को चुनौती देने का रुख अपनाया है। ऐसे में अब इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई और प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।
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