
Gita Press News: जब भी हम धार्मिक किताबों की बात करते हैं तो एक नाम जो सबसे पहले जहन में आता है वो है गीता प्रेस का । गोरखपुर में बसे गीता प्रेस का नाम दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित धार्मिक किताबों के प्रकाशकों में आता है। इस बार गीताप्रेस को साल 2021के लिए गांधी शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है, इस लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गीता प्रेस को पुरस्कार के लिए चुने जाने पर बधाई दी है।ऐसे में कई लोगों को ये उत्सुकता रहती है कि आखिर गीताप्रेस का सुनहरा इतिहास क्या है आप हम आपको उसी इतिहास से रुबरु कराएंगे।
इन्होंने की थी स्थापना
गीता प्रेस हिंदू धार्मिक ग्रंथों की छपाई करती है है, जिसमें श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस, रामायण, पुराण, तुलसीदार और सूरदास के सहित कई साहित्य छपते हैं। दरअसल, गीता प्रेस की असली शुरुआत साल 1923में हुई थी लेकिन इसकी नींव 1921में ही रख गई थी। जयदयाल गोयनका ने गीता प्रेस की स्थापना साल 1921में कोलकाता में गोविंद भवन ट्रस्ट में की थी। इसी ट्रस्ट के जरिए गीता का प्रकाशन होता था लेकिन यहां पर छपाई के दौरान कुछ गलतियां रह जाती थीं। जिसकी शिकायत जयदयाल गोयनका ने प्रेस के मालिक से की थी, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया था कि अगर गीता प्रेस का शुद्ध प्रकाशन चाहिए तो अपनी प्रेस की स्थापना कर लें। इस बात को लेकर उन्होंने खुद की प्रेस लगाने की ठान ली और फिर गोरखपुर में प्रेस की स्थापना का फैसला किया गया। फिर 29अप्रैल 1923को जय दयाल गोयनका, घनश्याम दास जलान और हनुमान प्रसाद पोद्दार ने मिलकर इसकी स्थापना की थी। गीता प्रेस की स्थापना 100साल पहले 10रुपये मासिक किराए के भवन में शुरू हुई और फिर उस परिसर को जुलाई 1926में 10हजार रुपये में खरीदा गया था।
दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक
गीता प्रेस दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है,इसने 14भाषाओं में 41.7करोड़ पुस्तकें प्रकाशित की हैं। जिनमें श्रीमद्भगवद्गीता की 16.21करोड़ प्रतियां शामिल हैं। विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। गीता प्रेस का मैनेजमेंट गवर्निंग काउंसिल (ट्रस्ट बोर्ड) संभालती है, क्योंकि गीता प्रेस न चंदा मांगती है और न ही विज्ञापन लेती। इस प्रेस का खर्च समाज के लोग ही उठाते हैं।ये औपनिवेशिक भारत का एकमात्र स्वदेशी प्रकाशन उद्यम है जो 21वीं सदी में भी फल-फूल रहा है। इसकी पुस्तकें अंग्रेजी, उर्दू और नेपाली सहित 14भाषाओं में प्रकाशित होती हैं, 20 रिटेल आउटलेट और भारत और विदेशों में 2500 से अधिक पुस्तक विक्रेता उन्हें बेचते हैं। और यह दिन ब दिन बढ़ रहा है।
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