
नई दिल्ली: HVI दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है, लेकिन आज भी भारत में लोगों को इस बीमारी को लेकर बहुत ही सीमित जानकारी है। लोग आज भी इस बीमारी को लेकर इतने जागरूक नही है। आज WORLDHIV DAYहै, और आज के दिन का यह महत्व है कि जादा से जादा लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक किया जाए। बता दे कि HIVका लास्ट स्टेज एड्स होता है और अब तक ये माना जाता था कि HIVके साथ तो भले ही इंसान जी सकता है लेकिन एड्स होने के बाद जिंदगी लंबी नहीं होती है। लेकिन आपको जानकार आश्चर्य होगा कि स्टेमसेल ट्रांसप्लांट से एचआईवी को भी ठीक किया जा सकता है और ऐसा यूएस की महिला के साथ हो चुका है, जो ब्लड कैंसर की भी मरीज थी।
पहली बार Aidsसे ठीक हुई महिला
आपको बता दे कि, अमेरिका में पहली बार एड्स से ठीक हुई महिला स्टेमसेल ट्रांसप्लांट के जरिये ट्रीटमेंट ली और वह एक बेहतर लाइफ जी रही है। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने पहली बार स्टेमसेल ट्रांसप्लांट के जरिये एड्स संक्रमित महिला का ट्रीटमेंट कर उसे इस जानलेवा कर उसे वायरस से मुक्त करने में सफलता पाई है। स्टेमसेल एक ऐसे व्यक्ति ने दान किए थे। जिसके अंदर एचआइवी वायरस के खिलाफ कुदरती प्रतिरोधक क्षमता थी।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की डॉ. इवोन ब्राइसन और बाल्टीमोर की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की डॉ डेब्रा परसॉड ने अपने अध्ययन में पाया था कि गर्भनाल के खून का इस्तेमाल करके एचआईवी को ठीक किया जा सकता है और ये ल्युकेमिया यानी ब्लड कैंसर की मरीज रही महिला पर काम कर भी गइ। महिला लगभग 1 साल से बेहर स्वस्थ महसूस कर रही है। महिला अब बिना किसी दवा के ही हेल्दी है और वह दुनिया की पहली महिला और कुल तीसरी मरीज है। अब तक दुनियाभर में केवल 3 लोग ही इस बीमारी से ठीक हो पाए हैं।
Leave a comment