QR Codes कोड से होगी असली और नकली दवा की पहचान, जानें कैसे काम करेगा ये सिस्टम

QR Codes कोड से होगी असली और नकली दवा की पहचान, जानें कैसे काम करेगा ये सिस्टम

नई दिल्लीदवाओं के बिना हमारा जीवन पहले जैसा नहीं रहेगा। जब भी हम बीमार पड़ते हैं तो हमें दवाओं की आवश्यकता होती है। लेकिन आज कल  का बाजार नकली दवाओं से भरा पड़ा है। ऐसे में इन दवाओं पर रोक लगाने का अहम फैसला लिया गया है। सरकार ने इस निर्णय के परिणामस्वरूप दवा पर एक क्यूआर कोड (QR codes), या बारकोड प्रिंट करने का आदेश दिया। 1 अगस्त, 2023 से यह क्यूआर कोड इंस्टॉल होना चाहिए। दवा बनाने वाली सभी दवा कंपनियों को सरकार ने यह निर्देश जारी किया है। इससे फर्जी दवाओं के बाजार को मैनेज किया जा सकता है। इन दवाओं को बेस मेडिसिन कहा जाता है।

इन क्यूआर कोड (QR codes)से किन महत्वपूर्ण डेटा की पहचान की जा सकती है:

1. दवा का नाम

2. दवा का ब्रांड नाम और सामान्य नाम

3. फार्मास्युटिकल फर्म का नाम और स्थान

4. ड्रग का बैच नंबर

5. दवा कब बनी थी

6. दवा की समाप्ति तिथि

7. दवा कंपनी का लाइसेंस नंबर

300 कंपनियां लगाएंगी बार कोड

फिलहाल, कानून द्वारा केवल 300प्रमुख दवा व्यवसायों को अपनी दवाओं को बार कोड के साथ लेबल करने की आवश्यकता है। इससे असली और नकली दवाओं में फर्क करना आसान हो जाएगा। इस प्रणाली का कार्यान्वयन 1अगस्त, 2023से शुरू होगा। उन कंपनियों में से अधिकांश शामिल हैं जो अपनी दवाएं उच्चतम खुदरा कीमतों पर बेचती हैं। इसमें थायरोनॉर्म, एलेग्रा, डोलो और सेरिडॉन सहित जाने-माने ब्रांड शामिल हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट है कि मध्य और निम्न आय वाले देशों में नकली दवाओं का वैश्विक व्यापार फलफूल रहा है। इन देशों में 10 फीसदी मेडिकल सप्लाई नकली है। ऐसी स्थिति से लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है। ऐसे में भारत सरकार की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में लोगों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। परिणामस्वरूप, लाखों लोग नकली दवाओं के उपयोग से बच सकते हैं।

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