
करनाल: रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस बीतने के बाद अब गणेश चतुर्थी की तैयारियां जोरों शोरों पर हैं। बाजारों में गणपति की मूर्तियां सज गयी हैं। कोविड काल के बाद इस बार गणपति घर-घर विराजमान होंगे और जगह-जगह पांडाल सजाए जाएंगे। गणेश चतुर्थी को लेकर कुम्हार बीते दो माह से तैयारियां कर रहे हैं। बाजार में 50 रुपये से हजारों रुपये तक की प्रतिमाएं बिक रही हैं।
गणेश चतुर्थी को लेकर मूर्तिकारों ने तैयारियां लगभग 6 महीने पहले ही शरू कर थी और अभी भी गणेश की मूर्ति बनाने में लगे हुए है। लोग दूर-दूर से गणेश भगवान की मूर्ति खरीदने के लिए आ रहे है। वहीं इस बार मूर्तिकारों के चेहरों पर खुशी जरूर झलक रही है। गणेश उत्सव को लेकर आम लोगों के बीच खासा उत्साह दिख रहा है। राजस्थान से करनाल आए कलाकार तीन महीने पहले से गणेश जी की मूर्ति गढ़ रहे हैं। अब यह काम अंतिम चरण में है। कलाकार बड़ी मूर्तियों के रंग रोगन में दिन रात जुटे हैं। वही कुम्हारों की माने तो इस बार भी मिट्टी काफी महंगी है। जो मिट्टी मूर्ती बनाने में इस्तेमाल होती है, उसे मंगाने में ही काफी दिक्कत आ रही है। इस बार भी बाजार में सबसे ज्यादा प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां ही बिकेंगी। अच्छी फिनिशिंग और चमकदार होने के कारण लोगों को यह बहुत पसंद आती है।
वही धर्मनगरी हरिद्वार में भी कई स्थानों पर भगवान श्री गणेश की प्रतिमा की स्थापना की जाती है।जिसको लेकर भी प्रदेश में काफी उत्साह दिखा। वही मूर्ति का विसर्जन को लेकर अलर्ट दिखा। प्रशासन इस बार मूर्ति का विसर्जन की अलग व्यवस्था करने जा रहा है। इसके लिए जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे ने नगर निगम के लिए जगह चिन्हित कर मूर्ति विसर्जन के लिए प्वाइंट्स बनाने के निर्देश दिए हैं।
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