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Haryana News: कॉमनवेल्थ में कांस्य जीतने वाले यशवीर का भिवानी में जोरदार अभिनंदन, युवाओं को दिया सफलता का मंत्र

Haryana News: कॉमनवेल्थ में कांस्य जीतने वाले यशवीर का भिवानी में जोरदार अभिनंदन, युवाओं को दिया सफलता का मंत्र

Haryana News: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का नाम रोशन कर कांस्य पदक जीतने वाले भिवानी के होनहार जैवलिन थ्रो खिलाड़ी यशवीर का अपने गृह जिले पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। एयरपोर्ट से लेकर भिवानी तक जगह-जगह फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन हुआ। पूरे जिले में जश्न का माहौल देखने को मिला। इस मौके पर यशवीर और उनके पिता ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी सफलता, संघर्ष और भविष्य के लक्ष्य साझा किए।

कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद पहली बार भिवानी पहुंचे यशवीर का स्वागत किसी चैंपियन से कम नहीं था। समर्थकों ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया, ढोल-नगाड़ों की धुन पर खुशी जताई और पूरे जोश के साथ उनका हौसला बढ़ाया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल यशवीर का परिवार बल्कि पूरा भिवानी जिला गौरवान्वित नजर आया।

यशवीर ने बताया कि यह उनके जीवन का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था और पहले ही प्रयास में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतना उनके लिए बेहद खास पल है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट से ही लोगों का जो प्यार और सम्मान मिल रहा है, वह उन्हें आगे और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दे रहा है। उन्होंने बताया कि खेल उनके परिवार की विरासत है। उनके दादा और पिता दोनों खेलों से जुड़े रहे हैं और बचपन से ही घर में खेल का माहौल रहा। पिता की प्रेरणा ने उन्हें जैवलिन थ्रो की ओर बढ़ाया और आज उसी मेहनत का परिणाम पूरे देश के सामने है।

यशवीर ने पिता को बताया अपना पहला आदर्श

यशवीर ने अपने पिता को अपना पहला आदर्श बताया। इसके बाद उन्होंने ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा को अपनी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि नीरज चोपड़ा के मुकाबले और वीडियो देखकर उन्हें लगातार सीखने का मौका मिला। कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल मुकाबले को याद करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता बेहद कड़ी थी और तेज हवा के कारण खिलाड़ियों को अतिरिक्त चुनौती का सामना करना पड़ा।

भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए यशवीर ने कहा कि अब उनका पूरा फोकस एशियन गेम्स और ओलंपिक पर है। उनका मानना है कि आने वाले समय में भारतीय जैवलिन थ्रो का स्तर और ऊंचा होगा क्योंकि जूनियर खिलाड़ी भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। डाइट को लेकर उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान वह बाहर का खाना पूरी तरह छोड़ देते हैं और केवल घर का बना भोजन ही खाते हैं। वहीं मजाकिया अंदाज में उन्होंने अपनी पसंदीदा चीजों में घी-चूरमा और आइसक्रीम का भी जिक्र किया। उन्होंने भिवानी के युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर खुद पर विश्वास और मेहनत करने का जज्बा हो तो कोई भी खिलाड़ी बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।

यशवीर के पिता ने बताया अगला टारगेट

यशवीर के पिता ने भी बेटे की इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि अब परिवार का अगला लक्ष्य ओलंपिक की तैयारी है और इसके लिए पूरी मेहनत की जाएगी। उन्होंने कहा कि खेल में जीत-हार लगी रहती है, लेकिन मेहनत और समर्पण कभी व्यर्थ नहीं जाता। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार कई पीढ़ियों से खेलों से जुड़ा रहा है और यही खेल संस्कृति आज यशवीर की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बनी है।

भिवानी के खिलाड़ियों के लिए संदेश देते हुए यशवीर के पिता ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। ईमानदारी, अनुशासन, कोच का सम्मान और जो भी सुविधाएं उपलब्ध हों, उन्हीं में मेहनत करते रहना ही खिलाड़ी को मंजिल तक पहुंचाता है।कॉमनवेल्थ गेम्स का यह कांस्य पदक सिर्फ यशवीर की जीत नहीं, बल्कि भिवानी की खेल परंपरा, परिवार की वर्षों की मेहनत और नई पीढ़ी के सपनों की भी जीत है। अब पूरे जिले की निगाहें यशवीर के अगले बड़े लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक पर टिकी हैं।

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