HARYANA NEWS: ईरान-इज़राइल युद्ध की गर्माहट पानीपत तक, जानें कैसे

HARYANA NEWS: ईरान-इज़राइल युद्ध की गर्माहट पानीपत तक, जानें कैसे

HARYANA NEWS: एक तरफ पूरी दुनिया की नजर ईरान-इज़राइल के युद्ध पर टिकी है, इस युद्ध की गर्माहट अब हमारे भारत के उद्योगों तक पहुंचने लगी है। खास तौर पर, हरियाणा का टेक्सटाइल हब पानीपत एक बहुत ही गंभीर आर्थिक मोड़ पर खड़ा है। पानीपत के निर्यातक जो कि दशकों से इज़राइल से व्यापार कर रहे हैं। उनकी चिंता ने हमें भी गहरी चिंता में डाल दिया है।

ईरान-इज़राइल युद्ध की वजह से क्रूड ऑयल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। जैसे ही क्रूड महंगा होता है, यार्न और पॉलिएस्टर, जो पानीपत की इंडस्ट्री की रीढ़ हैं, उनके दाम भी आसमान छूने लगते हैं। हरियाणा चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष विनोद धमीजा ने बताया कि इज़राइल व भारतीय कारोबार का एक भावनात्मक और भरोसेमंद साझेदारी है।

अध्यक्ष ने जानकारी दी कि नोएडा में हर साल लगने वाले ट्रेड फेयर में लगभग 50% बायर्स इज़राइल से आते हैं -और हम भारतीयों का उनसे एक भावनात्मक रिश्ता भी है। विनोद धमीजा ने कहा कि पानीपत हर साल 500 से 700 करोड़ रुपये का इज़राइल के साथ होम डेकोर प्रोडक्ट्स - जैसे कुशन कवर, परदे, बाथ मैट्स और रग्स - एक्सपोर्ट करता है। जबकि पूरे भारत में ये आंकड़ा 18 से 20 हज़ार करोड़ तक पहुंचता है। लेकिन अब एक डर व चिंता है कि सरकार  नीतियों में बदलाव कर सकती है अगर कोई पॉलिसी लागू होती है जिससे पेमेंट में देरी हो या रुकावट आए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

इंडस्ट्री एसोसिएशन महासचिव राजीव अग्रवाल ने बताया कि बीते 10 दिनों में यार्न और पॉलिएस्टर 5 रुपये प्रति किलो महँगे हो गए हैं। यानी लगभग 5% कच्चे माल की लागत बढ़ चुकी है।इसका असर आम जनता पर पड़ेगा।  क्योंकि कंबल, बेडशीट, और थ्री-डी डिज़ाइन वाली चादरों की कीमतें अब 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। अग्रवाल ने बताया कि पानीपत में रोज़ाना 2000 टन यार्न की खपत होती है मतलब हर दिन 20 करोड़ रुपये का यार्न खरीदा जाता है। अगर खरीदी महंगी होगी तो बिक्री महंगी होगी और अगर दाम बढ़े, तो मांग घटेगी। और अगर मांग घटी। तो रोज़गार, व्यापारी और आम आदमी के साथ सबकी कमर टूटेगी।

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