Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में ऑटो म्यूटेशन प्रणाली एवं पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में सभी जिलों के उपायुक्तों एवं राजस्व अधिकारियों ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ऑटो म्यूटेशन प्रणाली एवं पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 का शुभारंभ ‘विकसित भारत-विकसित हरियाणा’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य डिजिटल माध्यम से विभिन्न योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाकर प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को सरल और सुगम बनाना है।
कार्यक्रम के उपरांत उपायुक्त सतपाल शर्मा ने लघु सचिवालय के सभागार में जिले के राजस्व अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। उपायुक्त ने बताया कि ऑटो म्यूटेशन प्रणाली को प्रदेश में लागू करने से पूर्व इसे एक माह तक पायलट आधार पर संचालित किया गया तथा प्राप्त सभी सुझावों और फीडबैक को प्रणाली में शामिल किया गया। प्रारंभिक चरण में लगभग 50 हजार इंतकाल स्वतः दर्ज किए जा चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि ऑटो म्यूटेशन प्रणाली लागू होने से रजिस्ट्री होते ही स्वतः इंतकाल दर्ज हो जाएगा। जिन मामलों में खेवट विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल स्वीकृत हो जाएगा। वहीं, जिन मामलों में खेवट विभाजन आवश्यक होगा, उनमें अधिकतम 10 दिनों के भीतर इंतकाल का निपटान किया जाएगा। विरासत, पारिवारिक बंटवारे एवं न्यायालय की डिक्री आधारित इंतकालों का निपटान भी अधिकतम 10 दिनों के भीतर किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एवं पारदर्शी होगी। इसके अतिरिक्त, राजस्व विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर आगामी 15 दिनों के भीतर शेष सभी लंबित इंतकालों का समयबद्ध निपटान सुनिश्चित किया जाएगा।
ऑटो म्यूटेशन प्रणाली से होने वाले लाभों की जानकारी देते हुए उपायुक्त ने बताया कि रजिस्ट्री और इंतकाल की प्रक्रियाएं आपस में जुड़ जाएंगी, जिससे अलग से इंतकाल के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को बार-बार तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नागरिक अपने इंतकाल की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे तथा उसकी प्रति ऑनलाइन डाउनलोड और प्रिंट भी कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इस प्रणाली के लागू होने से लंबित इंतकालों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा भूमि अभिलेखों का अद्यतन कार्य अधिक तेजी से हो सकेगा।