
HARYANA NEWS: यूपीएससी के घोषित परिणाम में नरवाना की बेटी स्वाति आर्य ने 366वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र और परिवार का नाम रोशन किया है। जैसे ही इस सफलता की सूचना परिवार को मिली, घर में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्यों की आंखों में खुशी के आंसू थे और बधाई देने वालों का तांता लग गया। फोन पर लगातार रिश्तेदारों और परिचितों के बधाई संदेश आने लगे। घर पहुंचे लोगों को मिठाई खिलाकर परिवार ने अपनी खुशी साझा की।
स्वाति आर्य की इस उपलब्धि के बाद उनके घर में जश्न का माहौल बन गया। आसपास के लोग भी दूर-दूर से पहुंचकर उन्हें आशीर्वाद देने लगे। नरवाना की इस बेटी की सफलता आज पूरे क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। यह सफलता यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत सच्ची हो और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी सपना हकीकत बन सकता है।
स्वाति आर्य ने बताया कि जब उन्हें अपनी सफलता की जानकारी मिली तो कुछ समय तक उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली है। धीरे-धीरे जब उन्हें इस बात का एहसास हुआ तो उन्होंने गर्व और खुशी महसूस की कि वे अपने लक्ष्य तक पहुंच पाई हैं। उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा नरवाना के एमडीएन पब्लिक स्कूल से हुई। इसके बाद 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई एस डी पब्लिक स्कूल से पूरी की। आगे की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी ऑनर्स में की और इसके बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
स्वाति ने बताया कि वर्ष 2015में एक महिला IAS अधिकारी से प्रेरित होकर उन्होंने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा। इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने रोजाना लगभग 12से 13घंटे पढ़ाई की और ऑनलाइन कोचिंग की मदद भी ली। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के अपने फायदे और नुकसान होते हैं, लेकिन इसका सही उपयोग करके पढ़ाई के लिए एक अच्छा प्लेटफॉर्म भी बनाया जा सकता है। स्वाति ने खासतौर पर लड़कियों को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में एक लक्ष्य होना बहुत जरूरी है। यदि पूरी मेहनत और हिम्मत के साथ प्रयास किया जाए तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
स्वाति के पिता दिलबाग आर्य ने कहा कि बेटी की सफलता से उन्हें बेहद खुशी हुई है। उन्होंने कहा कि एक माता-पिता को किसी उपलब्धि से जितनी खुशी मिलती है, उससे कई गुना ज्यादा खुशी आज उन्हें महसूस हो रही है। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं। सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहने के कारण कई बार बच्चों पर उतना ध्यान नहीं दे पाए, इसलिए इस सफलता का पूरा श्रेय वे अपनी धर्मपत्नी को देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने शुरू से ही बच्चों की बहुत अच्छी परवरिश की और उन्हें सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता। परिवार का नाम रोशन करने की क्षमता दोनों में समान होती है।
स्वाति की माता ने बताया कि जैसे ही उन्हें बेटी की सफलता की सूचना मिली तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। उन्हें पहले से ही विश्वास था कि उनकी बेटी एक दिन जरूर सफल होगी। उन्होंने बताया कि स्वाति रोजाना 10से 12घंटे तक पढ़ाई करती थी और बहुत अनुशासन के साथ अपनी तैयारी कर रही थी।स्वाति की माता खुद भी एक शिक्षिका हैं और उन्होंने घर के कामकाज के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई को भी अच्छे से संभाला और हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
स्वाति की बहन ने बताया कि जैसे ही उन्हें UPSC परीक्षा में सफलता की खबर मिली, उस पल की खुशी को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि स्वाति ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है। वह रोज सुबह उठकर पढ़ाई करती थी और अपने लक्ष्य के लिए लगातार संघर्ष करती रही।उन्होंने कहा कि दोनों बहनों के बीच बहुत गहरा लगाव है और वे एक-दूसरे की पढ़ाई में हमेशा मदद करती थीं।
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