Haryana News: हरियाणा के अंबाला जिले के महमूदपुर गांव के रहने वाले महज चार वर्षीय मयन सैनी ने अपनी विलक्षण प्रतिभा से ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिस पर परिवार ही नहीं बल्कि पूरा गांव गर्व कर रहा है। मयन ने इतनी छोटी उम्र में दो विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। मयन की इस सफलता के पीछे उनकी मां मधू सैनी की मेहनत और खेल-खेल में दी गई सीख की अहम भूमिका रही है।
अंबाला के महमूदपुर गांव के 4 वर्षीय नन्हे बालक मयन सैनी की, जिसने अपनी उम्र से कहीं बड़ी उपलब्धि हासिल कर पूरे हरियाणा का नाम रोशन किया है। चार साल की उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, लेकिन मयन सैनी ने पूरी दुनिया को अपनी यादाश्त में बसा लिया है। मयन ने अपना पहला विश्व रिकॉर्ड 12 मई 2026 को बनाया। अंबाला में आयोजित कार्यक्रम में नन्हें मयन सैनी ने महज 1 मिनट 44 सेकंड में 195 देशों के राष्ट्रीय झंडों की पहचान कर उनके नाम भी बताए। उसकी इस तेज रफ्तार और सटीक यादाश्त को देखकर मौजूद लोग दंग रह गए। इस उपलब्धि के बाद मयन का नाम वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
पहले रिकॉर्ड के बाद महज चार साल के मयन ने दूसरा कारनामा 10 जुलाई 2026 को कर दिखाया। महज 4 साल 8 माह 10 दिन की उम्र में मयन ने रंगीन ब्लैंक वर्ल्ड मैप पर महाद्वीपवार सभी देशों की सही-सही पहचान की। ये पूरा कार्य उसने सिर्फ 2 मिनट 19.8 सेकंड में पूरा कर दूसरा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के लिए मयन को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से सितंबर में प्रमाण-पत्र भी प्राप्त हुआ है। मयन की माता मधू सैनी बताती हैं कि मयन की रुचि शुरू से ही किताबों से ज्यादा देशों, झंडों और विश्व मानचित्र को जानने में थी! मयन घंटो ग्लोब और झंडों वाली किताबों को देखता रहता था।
मयन की इस रुचि को देखते हुए उसकी मां मधू सैनी और पिता रोहित सैनी ने उस पर पढ़ाई का दबाव बनाने के बजाय एक अलग तरीका अपनाया। उन्होंने खेल-खेल में ही मयन को देशों और झंडों की पहचान कराना शुरू किया। कभी झंडों के कार्ड से तो कभी मैप पर रंग भर कर उसे पहचान बताई। लगातार अभ्यास पिता की इस अनोखी सीख ने मयन को इतना निपुण बना दिया कि आज वो दुनिया के किसी भी देश का झंडा देखते ही उसका नाम बता देता है। आज मयन की इस दोहरी उपलब्धि से उनका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा महमूदपुर गांव उत्साहित है। ग्रामीण बच्चे मयन सैनी की विलक्षण प्रतिभा के साथ-साथ उसकी मां मधू सैनी और पिता के प्रयासों की भी जमकर सराहना कर रहे हैं। चार साल की उम्र और दो विश्व रिकॉर्ड मयन सैनी की यह उपलब्धि निश्चित तौर पर यह साबित करती है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।