
H3N2 virus scare: कोविड-19 के बाद अब इन्फ्लूएंजा के सब टाइप एच3एन2 के मामले पूरे देश में बढ़ रहे है। यह वायरस भारत में तीन मरीजों की जान ले चुका है। हालांकि यह आमतौर पर हल्की बीमारी का कारण ही बनता है। केवल कमजोर इम्यूनिटी वालों को ही गंभीर बीमारी का खतरा होता है। लेकिन ये वायरस शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि H3N2इन्फ्लूएंजा पहले से ही किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों कोगंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीज ध्यान रखें
डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीजों में अगर इन्फ्लूएंजा संक्रमण हो जाता है तो ये काफी खतरनाक हो सकता है। इससे मरीजों को हार्ट संबंधी परेशानी तक हो सकती है। डॉक्टर हिमांशु शर्मा कहते हैं कि क्रोनिक किडनी डिजीज वाले मरीजों में किसी भी वायरस से खतरा ज्यादा होता ही है। ऐसे में जिन लोगों को किडनी की गंभीर बीमारी है उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है। डायलिसिस कराते समय या घर से बाहर जाने के दौरान इन्फ्लूएंजा से बचाव करना होगा। अगर किडनी के मरीज को ये वायरस हो जाता है तो स्थिति बिगड़ सकती है।
भारत में H3N2फ्लू के मरीजों में डॉक्टर देख रहे हैं ये लक्षण
- प्रमुख लक्षण मौसमी फ्लू के विषाणुओं से मिलते-जुलते हैं। इनमें बुखार, खांसी और नाक बहने जैसे श्वसन लक्षण शामिल हैं।
- अन्य संभावित लक्षणों में शरीर में दर्द, मतली, उल्टी या दस्त शामिल हो सकते हैं।
- कई बार मरीजों को मांसपेशियों में तेज दर्द भी हो रहा है
- निमोनिया जैसे लक्षण वाले मरीज भी अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
- कुछ बुजुर्ग रोगियों में बेहोशी देखी गई है
- लोग तेजी से "पोस्ट वायरल सिंड्रोम जैसे गंभीर खांसी" के साथ आ रहे हैं और उन्हें "मौखिक दवा और नेब्युलाइज़र" की आवश्यकता है।
- देखा गया एक अतिरिक्त लक्षण कान का भरा होना है जिसकी शिकायत कई रोगी बीमारी के पांचवें या छठे दिन करते रहे हैं। उन्हें ऐसा महसूस होता है कि कानों के अंदर कुछ अवरुद्ध है जो प्लग महसूस होता है। यह लक्षण युवा वयस्कों में अधिक आम है।
वायरस से बचाव के उपाय
1.बीमार पड़ने से बचने के लिए इन चरणों का पालन करना सुनिश्चित करें:
2. अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोकर या हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करके स्वच्छता बनाए रखें
3. अपने चेहरे और नाक को छूने से बचें
4. भीड़भाड़ वाली जगहों पर जब भी बाहर जाएं तो मास्क जरूर लगाएं
5. जब भी खाँसें या छींकें तो अपना मुँह और नाक अवश्य ढक लें
6. हाथ मिलाने जैसे शारीरिक संपर्क में शामिल न हों
7. थूकें नहीं
8. खूब सारे तरल पदार्थ पिएं
9. सीने में जमाव को कम करने के लिए स्टीम बाथ लें
10. निर्जलित होने से बचने के लिए कम उच्च सोडियम या उच्च चीनी वाला खाना खाएं
11. गले में खराश को कम करने के लिए गर्म नमकीन घोल से गरारे करें
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