पैरों में सोना पहनने से भगवान हो जाते है नाराज, क्या है इसके पीछे की मान्यता

पैरों में सोना पहनने से भगवान हो जाते है नाराज, क्या है इसके पीछे की मान्यता

नई दिल्ली: देश में त्योहारों का सीजन शुरु हो गया है। इन दिनों पूरे देश में नवरात्रे त्योहार मनाया जा रहा है, कुछ दिनों बाद दिपावली की तैयारी शुरु हो जाएगी और बाजार भी पूरी तरह सज कर तैयार हो गए हैं। बाजार में लोगों की चहल-पहल भी देखने को मिल रही है। भले ही सोने-चांदी के भाव बढ़ गए हो, फिर भी लोग जमकर खरीददारी कर रहे हैं। कहा जाता है कि सोना महिलाओं को अत्यंत प्रिय हैऔर वो इसे पहना खुब पसंद करती है। लेकिन क्या अपने कभी सोचा है की पैरों में सोना क्यों नहीं पहना जाता हैं? आखिर इसके पीछे का इतिहास क्या है?

धार्मिक मान्यताएं

हिंदु धर्म से सद्दियों से चली आ रही कुछ परंपराए और मानताएं है जिसे अपने घर हम देखते और सुनते आए है। ऐसे में अपने कभी अपने किसी बड़े को पैरें में सोना पहने हुए देखा है, और नहीं तो क्या आपने कभी इसके पिछे का कारण जानने की कोशिश की?

माना जाता है कि सोना धारण करने से विष्णु भगवान बहुत खुश होते हैं क्योकि सोना उन्हें बहुत पसंद है इसलिए नाभि के नीचे इसे कभी नहीं पहनना चाहिए। पैरों में सोना पहनना कहीं न कहीं उनका अपमान करने के समान है। ऐसे में व्यक्ति को उनकी कृपा नहीं मिल पाती है। साथ ही माता लक्ष्मी का प्रिय रंग है पीला। सोने का रंग भी पीला ही होता है इसलिए सोने का कनेक्शन लक्ष्मी जी से भी है। इस वजह से भी सोने को नाभि के नीचे नहीं पहनना चाहिए इससे धन की देवी रुठ जाती हैं। ऐसे में व्यक्ति को कई सारी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

वैज्ञानिक कारण

सोना न पहनने का वैज्ञानिक कारण भी है। इन्हीं में एक है पैर में सोना न पहनना। पैरों में सोना न पहनने को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सही माना गया है। इसके अनुसार, मानव की शारीरिक बनावट ऐसी है, जिसमें शरीर के ऊपरी भाग को ठंडक और निचले हिस्से को गर्माहट ही ज़रूरत होती है। सोने के आभूषण शरीर में गर्मी को बढ़ाते हैं। ऐसे में यदि आप पैरों में सोने के बने जेवर पहनते हैं तो इससे आपके शरीर को नुकसान हो सकता है, इसलिए पैरों में चांदी के आभूषण पहने जाते हैं, जिससे कि शरीर का तापमान संतुलित रहे।

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