
नई दिल्ली: करवा चौथ व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए एक बड़ा त्योहार होता है। जिसे वह बड़े ही हर्षो-उल्लास के साथ मनाती हैं। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए दिन भर कठिन निर्जला व्रत रखती हैं और ईश्वर से आशीर्वाद प्राप्त करती है। देर शाम महिलाएं चांद को देखकर उसकी पूजा करती है और अपने पति के हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ती है। लेकिन हमने हमेशा देखाते है कि ये व्रत सिर्फ सुहागन महिलाएं ही रखती है, क्या कुआरी लड़कियां ये व्रत नही रख सकती है? क्या है उनके इस व्रत को रखने के नियम? जाने पूरी जानकारी इस खबर में।
लड़कियां रख सकती है करवाचौथ व्रत
बताया जाता है कि अविवाहित लड़कियां अपने मंगेतर या प्रेमी जिसे वो अपना जीवन साथी मान चुकी हों, उनके लिए करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं। मान्यता है कि इससे उन्हें करवा माता का आशीष प्राप्त होता है। लेकिन कुंवारी कन्याओं के लिए करवा चौथ व्रत व पूजन के नियम अलग-अलग होते हैं
जानें अविवाहित महिलाओं के व्रत नियम
• यदि कोई कुंवारी लड़की करवा चौथ का व्रत रखने जा रही है तो निर्जला व्रत करने के बजाए निराहार रहकर व्रत कर सकती है। मान्यता के अनुसार, कुंवारी कन्याओं के लिए निर्जला व्रत रखने की कोई बाध्यता नहीं होती है, क्योंकि उन्हें सरगी आदि नहीं मिल पाती है।
• महिलाएं इस व्रत में भगवान शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा आराधना करती है। लेकिन कुंवारी कन्याओं को करवा चौथ के व्रत में केवल मां करवा की कथा सुननी चाहिए व भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करना चाहिए।
• कुंवारी लड़कियां तारों को देखकर अर्घ्य दे सकती हैं और व्रत का पारण कर सकती हैं। मान्यता के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देने का नियम केवल सुहागिन स्त्रियों के लिए होता है।
• अविवाहित लड़कियों को छलनी के प्रयोग करने की कोई बाध्यता नहीं है। वे बिना छलनी के ही तारों को देखकर अर्घ्य दे सकती हैं और व्रत का पारण कर सकती हैं।
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