किसानों ने सरकार को दिया अल्टीमेटम, बातचीत न होने पर कल फिर करेंगे दिल्ली कूच

किसानों ने सरकार को दिया अल्टीमेटम, बातचीत न होने पर कल फिर करेंगे दिल्ली कूच

Farmers Protest: शंभू बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों ने बीते दिन एक बार फिर दिल्ली कूच की कोशिश की थी। इस कोशिश में पंजाब-हरियाणा सीमा पर पुलिस जवानों के साथ झड़प में कुछ किसानों के घायल भी हुए है। जिसके बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने शुक्रवार को दिल्ली तक अपना पैदल मार्च शनिवार तक के लिए स्थगित कर दिया।

बता दें, किसानों का हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. जिसमें करीब 8 किसान घायल हो गए। ऐसे में प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्ली की ओर अपना पैदल मार्च शुक्रवार को स्थगित कर दिया। वहीं, किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि केंद्र सरकार ने बातचीत शुरू नहीं की तो कल किसान फिर दिल्ली कूच करेंगे। उनका कहना है कि हम नहीं चाहते कि स्कूल बंद हों, इंटरनेट बंद हो, केंद्र सरकार बातचीत करे. हम बातचीत के लिए तैयार हैं।

आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल

किसान अपने मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र पर बातचीत शुरू करने के लिए भी दबाव डाल रहे हैं। हरियाणा पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को प्रदर्शन स्थल से कुछ मीटर की दूरी पर रोक दिया गया। पुलिस ने किसानों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत अंबाला प्रशासन द्वारा लगाए गए निषेधाज्ञा आदेश का हवाला देते हुए आगे बढ़ने से रोका।

बता दें, धारा 163 के तहत जिले में एक साथ पांच या अधिक लोगों के एक जगह पर एकत्रित होने पर प्रतिबंध है। किसानों ने बैरिकेड्स हटाकर जबरदस्ती आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। किसानों को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों को आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल करना पड़ा। किसान संगठनों, संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा के आह्वान पर 101 किसानों के पहले जत्थे ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आगे बढ़ा। किसानों ने शंभू सीमा से दोपहर 1 बजे दिल्ली के लिए पैदल मार्च शुरू किया। 

किसानों की प्रमुख मांगें

किसानों ने अपनी 12 मांगें पेश की है। जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग प्रमुख प्रमुख है। डीएपी खाद की कमी को दूर किया जाए। किसानों का कर्जा माफ किया जाए और उन्हें पेंशन दी जाए। इसके अलावा भी किसानों की मांगे हैं।   

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