CJP Protest Violence: CJP प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी आपबीती बताई। एक घायल दिल्ली पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) की बेटी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनके पिता को भीड़ ने घेर लिया था और उन्हें पीट-पीटकर मारने की कोशिश की गई। पुलिसकर्मी की बेटी ने बताया कि उनके पिता पहले भारतीय नौसेना में 15 साल तक सेवा दे चुके हैं। वह नेवी में मरीन कमांडो रह चुके हैं और बाद में दिल्ली पुलिस में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान उनकी ड्यूटी बैरिकेड के पास सबसे आगे तैनात पुलिसकर्मियों में थी।
प्रदर्शन स्थल पर असामाजिक तत्व भी शामिल
उन्होंने बताया कि उनके पिता ने घर आकर कहा था कि यह प्रदर्शन अब केवल छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया था। उनके मुताबिक, प्रदर्शन स्थल पर कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए थे, जिससे माहौल बिगड़ गया था। पुलिसकर्मी की बेटी ने बताया कि 25 तारीख को दोपहर करीब 2 बजे जंतर-मंतर के पास उनके पिता को भीड़ ने खींच लिया और हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि हमले के बाद उनके पिता करीब चार घंटे तक आरएमएल अस्पताल में बेहोश रहे। रात करीब 10 बजे उनके साथी उन्हें घर लेकर आए। उस समय उनकी वर्दी पूरी तरह खून से सनी हुई थी।
परिवार के लिए बेहद दर्दनाक था
उन्होंने ये भी कहा कि यह दृश्य परिवार के लिए बेहद दर्दनाक था। बेटी ने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनके पिता को अपराधी बताया जा रहा था, जिससे उन्हें काफी दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, वे बाद में सुप्रीम कोर्ट में शिकायत लेकर पहुंच गए। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने भी न्याय की मांग करने का फैसला किया। घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने एक वकील के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखने की कोशिश की। वकील ने उन्हें भरोसा दिलाया कि देश के हर नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है।
पुलिसकर्मियों के परिवारों का आरोप
वहीं, हिंसा में घायल एक दिल्ली पुलिस एसीपी की पत्नी ने भी अपनी परेशानी साझा की। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई की रात जब उनके पति घायल हालत में घर लौटे तो यह उनके और उनकी दो साल की बेटी के लिए बेहद डरावना और भावुक पल था। पुलिसकर्मियों के परिवारों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने माहौल खराब किया और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को खतरे में डाला। उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। परिवारों ने यह भी कहा कि जो छात्र इस मामले में शामिल हैं, उनके रिकॉर्ड की जांच के बाद उचित निर्णय लिया जाए। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की निंदा की और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
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