Hariyali Teej Ritual: हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करवा चौथ और हरियाली तीज का व्रत रखती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, हरियाली तीज श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस साल इस तिथि की शुरुआत 14 अगस्त शुक्रवार शाम 6:46 बजे होगी, जिसका समापन 15 अगस्त शनिवार शाम 5:28 बजे होगा। हालांकि, उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज 15 अगस्त को ही मनाई जाएगी और इसी दिन व्रत और पूजा की जाएगी। लेकिन क्या आप जानते है कि शादी के बाद की पहली हरियाली तीज लड़की अपने ससुराल की बजाय अपने मायके में ही क्यों मनाती हैं?
सुहागिन महिलाओं का त्योहार हरियाली तीज
बता दें, अपने सुखी दांपत्य जीवन और पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन महिलाओं सच्चे मन से हरियाली तीज का व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत तरीके से पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रुप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें हरियाली तीज के दिन ही अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। तभी से सुहागिन महिलाओं के लिए ये दिन और व्रत सबसे खास होता है।
लेकिन ये दिन सिर्फ सुहागिन महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि कुंवारी कन्याओं के लिए खास होता है। भगवान शिव जैसा वर पाने और सुखी ससुराल पाने के लिए कुंवारी कन्याओं भी हरियाली तीज का व्रत रखती हैं। इसी के साथ यह दिन नवविवाहित महिलाओं के लिए भी खास होता है।
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पहली हरियाली तीज मायके में मनाने की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं की मानें तो शादी के बाद लड़कियां अपनी पहली हरियाली तीज पर मायके में ही मनाती है। दरअसल, इस परंपरा के पीछे का बड़ा कारण है। शादी से पहले का सारा समय लड़की अपने घर यानी अपने मायके में बिताती है। उस जगह से उसकी कई सारी यादें दुड़ी होती है। लेकिन शादी के बाद लड़कियों को अपने पति के घर जाना पड़ता है। इसलिए उन्हें अपने मायके की याद न आए, इसके लिए ही उन्हें उनकी पहली हरियाली तीज के लिए मायके भेजा जाता है। जिससे उन्हें ये नहीं लगे कि शादी के बाद भी सबकुछ वैसा ही है, जैसा शादी से पहले था।
राधा रानी से जुड़ी है तीज पर मायके आने की परंपरा
इसके अलावा ये परंपरा राधा रानी से जुड़ी हुई मानी जाती है। बरसाना में हरियाली तीज के दिन राधा रानी और श्रीकृष्ण का झूलन महोत्सव मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन राधा रानी अपने ससुराल नंदगांव से अपने मायके बरसाना आती हैं।