E10 Petrol Coming Back: भारत में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल दोबारा उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है। E10 पेट्रोल में 10 फीसदी एथेनॉल मिलाया जाता है, जबकि मौजूदा समय में देश में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, सरकार की यह चर्चा अभी शुरुआती स्तर पर है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की 19 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के स्तर पर पुराने वाहनों को ध्यान में रखते हुए E10 पेट्रोल को विकल्प के तौर पर फिर से लाने को लेकर बातचीत शुरू हुई है। इसमें तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। देश की ईंधन सप्लाई और पेट्रोल पंपों तक इसकी पहुंच की व्यवस्था भी चर्चा का हिस्सा है।
पुराने वाहनों के मालिकों की बढ़ी चिंता
E20 पेट्रोल को लेकर सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों में देखी जा रही है जिनके वाहन पुराने हैं या जो E20 ईंधन के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। खासकर पुराने दोपहिया और कार मालिकों की ओर से ईंधन के विकल्प की मांग उठती रही है। कुछ वाहन मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से उनके वाहन का माइलेज प्रभावित हो सकता है। हालांकि, सरकार लगातार इन चिंताओं को दूर करने की कोशिश करती रही है। सरकार का कहना है कि E20 ईंधन बेहतर है और इससे वाहनों के इंजन के हिस्सों को नुकसान नहीं होता।
E10 और E20 दोनों रखने में बड़ी चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती देशभर के पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग तरह के ईंधन की व्यवस्था करना है। इससे पहले सरकार ने कहा था कि देश में E10 और E20 जैसे अलग-अलग ग्रेड के पेट्रोल उपलब्ध कराना लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बड़ी चुनौती होगा। अगर दोनों तरह के पेट्रोल को पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराया जाता है तो अलग भंडारण, परिवहन और सप्लाई की जरूरत होगी। इससे तेल कंपनियों और पेट्रोल पंपों की लागत बढ़ सकती है और पूरी सप्लाई व्यवस्था ज्यादा जटिल हो सकती है।
भारत ने समय से पहले हासिल किया लक्ष्य
भारत ने पिछले साल पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया था। यह लक्ष्य तय समय से करीब पांच साल पहले पूरा हुआ। सरकार एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देकर पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और देश में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। फिलहाल E10 को फिर से विकल्प के रूप में लाने पर केवल शुरुआती चर्चा चल रही है। आने वाले समय में तकनीकी रिपोर्ट, लागत और सप्लाई व्यवस्था का अध्ययन करने के बाद ही इस पर कोई अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
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