शरीर में मेलेनोसाइट्स की कमी से हो सकती है आपको ये खतरनाक बीमारी, इस खबर में मिलेगी पूरी जानकारी

शरीर में मेलेनोसाइट्स की कमी से हो सकती है आपको ये खतरनाक बीमारी, इस खबर में मिलेगी पूरी जानकारी

नई दिल्ली: हम सभी चाहते है कि हमारी त्वचा हमेशा बेदाग और ठीक रहे। ऐसे करने के लिए हम रोजमर्रा में बहुत उपाय करते है। हालांकि बढ़ती उम्र के साथ चहरे पर झुरीयां, दाग आ जाते है। लेकिन इन लक्षणों को दूर करने के लिए हम बाहरी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट का उतना ही इस्तेमाल करते है।

ऐसे में आज हम त्वाचा पर होते सफेद दाग के बारे में बात करेगें। सफेद दाग को विटिलिगो भी कहा जाता है। आपके मन में भी इससे जुड़े कई सवाल उठते होंगे आखिर कैसे होता है ये सफेद दाग?, अचानक तो नहीं होती होगी ये बीमारी। इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं? सफेद दाग होने के बाद शरीर पर इसका क्या असर होता है? सफेद दाग हो जाए तो क्या करना चाहिए? ऐसे कई सारे सवालों के जवाब देने की कोशिश हम आपको बताने जा रहे है।

सफेद दाग को लेकर हमेशा हमारे मन में एक डर रहता है कि कहीं ये हमकों न हो जाए। सिर्फ इतना ही नहीं जिनको ये होता है उनसे हम दूर रहना ज्यादा पसंद करते है ये बीमारी हमकों छुआछूत जैसी लगती है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की ये कोई ऐसी छुआछूत जैसी बीमारी नहीं है बल्कि ये हमारे शरीर में हार्मोनल चेंजेज के कारण होता है। वहीं कई लोगों का कहना है कि गलत खान-पान की वजह से भी यह बीमारी हो जाती है।

क्या कहते है डॉक्टर्स

डॉक्टर्स का कहना है कि जब किसी भी व्यक्ति के शरीर में 'मेलेनोसाइट्स' यानी स्किन का रंग बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती है तो उसे 'ल्यूकोडर्मा' या 'विटिलिगो' या सफेद दाग की बीमारी हो जाती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह बीमारी जेनेटिक भी हो सकती है। स्किन स्पेशलिस्ट के मुताबिक जिन व्यक्तियों को थायराइड की प्रॉब्लम होती है। उन्हें भी इस बीमारी होने का खतरा रहता है। मेडिकल साइंस में इसका इलाज करके इसे बिल्कुल ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसे कुछ हद तक कम किया जा सकता है। लेकिन यह पूरी तरह से ठीक नहीं होता।

 

सफेद दाग या विटिलिगो के शुरुआती लक्षण क्या है

सफेद दाग के शुरुआती लक्षणों में स्किन का रंग जगह- जगह फीका पड़ने लगता है या सफेद पड़ना शुरु होता है। इसकी शुरुआत सबसे पहले होती हाथ, पैर, चेहरा, होंठ से होता है। यह ऐसी जगह है जहां डायरेक्ट सूरज की रोशनी पड़ती है। बाल का रूखा होना, दाढ़ी और आईब्रो का रंग उड़ जाना या सफेद हो जाना भी इसके लक्ष्ण है। साथ ही आंख के रेटिना की परत का रंग फीका पड़ जाना।

मेडिकल साइंस की भाषा में बोले तो यह बताना मुश्किल है कि सफेद दाग का रोग एक बार हो जाने के बाद कितना बढ़ सकता है। कई बार सही इलाज से नई दाग बनने बंद हो जाते हैं। ज्यादातर मामलों में सफेद दाग धीरे- धीरे बढ़ने लगते हैं और शरीर के सभी हिस्सों में फैल जाते हैं।

 सफेद दाग होने के बाद शरीर में दिखते हैं ये बदलाव

सोशल और साइकोलॉजिकल प्रेशर

भारतीय समाज में सफेद दाग की बीमारी को छुआछूत से जोड़कर देखा जाता है। जिसकी वजह से इसके मरीज है उन पर एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

स्किन कैंसर

इस बीमारी की वजह से सनबर्न और स्किन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

आंख संबंधी बीमारियां

सफेद दाग शरीर पर कई तरह के प्रभाव डालता है। जैसे- आंखों में दिक्कतें शुरू होना। आइरिस में जलन के साथ-साथ सूजन।

बहरापन

सुनने की क्षमता में कमी आना।

Leave a comment