डेंगू और चिकनगुनिया के बुखार में क्या है अंतर? जानें इसके लक्षण

डेंगू और चिकनगुनिया के बुखार में क्या है अंतर? जानें इसके लक्षण

नई दिल्ली: देशभर में आजकल डेंगू और चिकनगुनिया के मामले बढ़ते जा रहे है। आमतौर पर इस तरह के बुखार मॉनसून में होते है, लेकिन बारिश होने की वजह से किसी भी मौसम में लोग इस तरह के बुखार की चपेट में आ सकते है। ये दोनों ही रोग मच्छरों के काटने से होते है, दोनों के लक्षण भी कुछ हद तक एक जैसे ही होते है, लेकिन क्या आपको इन दोनों बीमारियों में होने वाली बुखार में अंतर के बारे में पता है? आज हम आपको दोनों में अंतर के बारे में बताने वाले है।

किस वजह से होते हैं चिकनगुनिया और डेंगू?

डेंगू और चिकनगुनिया, दोनों ही मच्छर के काटने से होते हैं। जहां चिकनगुनिया जीनस अल्फावायरस के कारण होता है, वहीं डेंगू जीनस फ्लेवीवायरस की वजह से होता है। दोनों का शुरुआती लक्षण बुखार ही होता है।

 

चिकनगुनिया के लक्षण

 

डेंगू की तरह चिकनगुनिया में भी पहले बुखार होता है और जोड़ो में तेज दर्द होता है। यह दर्द बहुत असहनीय भी होता है, जो बुखार के जाने के बाद भी कुछ दिनों तक बना रहता है। इसी के साथ चिकनगुनिया में गले में खराश भी होती है और आंखों में दर्द की शिकायत होती है। चिकनगुनिया बुखार 2 से 12 दिन तक रहता है, लेकिन रोगी को इससे उबरने के लिए महीनों लग जाते हैं।

 

डेंगू से सुरक्षित कैसे रहा जा सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू से सुरक्षित रहने के लिए बचाव सबसे बेहतर उपाय हो सकता है। मच्छरों से बचने के प्रयास करें, डेंगू के मच्छर दिन के समय में अधिक काटते है। पूरी आस्तीन वाले कपड़ो को पहने। डेंगू के मच्छर आम तौर पर स्थिर और साफ पानी में प्रजनन करते है,इसलिए मच्छरों को बढ़ने से रोकने के लिए पानी एकत्रित न होनें दे। सप्ताह में कम से कम एक बार खाली कंटेनर, फूलदान, कूलर आदि से पानी निकालकर उन्हें साफ जरूर कर लें। इस तरह के बचाव के उपायों को प्रयोग में लाकर डेंगू के संक्रमण से सुरक्षित रहा जा सकता है।

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