Delhi News: लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने दिल्लीवासियों को बड़ी राहत दी है। राजधानी की हवा करीब तीन साल बाद पहली बार 'गुड' (अच्छी) श्रेणी में पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 48 दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले यह 59 था। AQI का 0 से 50 के बीच होना 'गुड' श्रेणी माना जाता है। दिल्ली में इससे पहले 10 सितंबर 2023 को हवा की गुणवत्ता 'गुड' श्रेणी में पहुंची थी। उस समय भी भारी बारिश और जी-20 सम्मेलन के दौरान लागू विशेष प्रतिबंधों के कारण प्रदूषण का स्तर कम हुआ था।
क्या कहते है विशेषज्ञों?
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की बारिश प्राकृतिक एयर प्यूरीफायर की तरह काम करती है। बारिश की बूंदें हवा में मौजूद PM2.5, PM10, धूल, धुआं और अन्य प्रदूषक कणों को अपने साथ जमीन पर ले आती हैं। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में 'वेट डिपोजिशन' कहा जाता है। बारिश के साथ तेज हवाएं भी प्रदूषण कम करने में मदद करती हैं। इससे सड़कों और निर्माण स्थलों की धूल कम उड़ती है और प्रदूषक वातावरण में जमा नहीं हो पाते। यही वजह है कि मानसून के दौरान दिल्ली की हवा सामान्य दिनों की तुलना में काफी साफ हो जाती है।
केवल बारिश स्थायी समाधान नहीं- विशेषज्ञ
हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बारिश से दिल्ली की प्रदूषण समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) की विशेषज्ञों के अनुसार, साफ हवा बनाए रखने के लिए पूरे साल वाहनों, उद्योगों, निर्माण कार्य, कूड़ा जलाने और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना जरूरी है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2015 में AQI प्रणाली लागू होने के बाद से अब तक दिल्ली में केवल 15 दिन ही ऐसे रहे हैं, जब हवा 'गुड' श्रेणी में रही। यानी औसतन साल में सिर्फ एक या दो दिन ही राजधानी को पूरी तरह साफ हवा मिल पाती है।
दिल्ली में AQI सबसे कम 23 दर्ज किया गया
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हवा की गुणवत्ता में भी अंतर देखने को मिला। डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज क्षेत्र का AQI सबसे कम 23 दर्ज किया गया, वहीं, जहांगीरपुरी इलाके में AQI 102 रहा, जो 'मॉडरेट' श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश लोगों को कुछ समय के लिए राहत जरूर दिला सकती है, लेकिन जैसे ही मानसून समाप्त होता है, प्रदूषण फिर बढ़ने लगता है। इसलिए दिल्ली में सालभर प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण ही साफ हवा का स्थायी समाधान हो सकता है।
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