
Delhi Assembly: दिल्ली विधानसभा में आज शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की CAG रिपोर्ट पेश होनी है। इस रिपोर्ट में दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर सरकारी अस्पतालों की स्थिति को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में मोहल्ला क्लीनिकों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा रिपोर्ट में अस्पतालों में बेड और मेडिकल स्टाफ की भारी कमी को दर्शाया गया है।
गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा में CAG की ये दूसरी रिपोर्ट है। पहली रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी के शराब नीति घोटाले और शीशमहल के मुद्दे को उठाया गया था।
स्वास्थ्य बजट पर उठेगा सवाल
CAG रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जितना बजट आवंटित किया था, उतना खर्च ही नहीं किया गया। रिपोर्ट कहा गया है कि दिल्ली में 14 ऐसे अस्पताल हैं, जहां आईसीयू नहीं है। जबकि 12 ऐसे अस्पताल हैं, जहां एंबुलेंस ही उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, मोहल्ला क्लीनिकों में शौचालय की कोई व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जो बजट आवंटित किया था, उसका कहां यूज किया गया है?
कोरोना महामारी के लिए दिए गए थे इतने रुपए
CAG रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने कोविड-19 से निपटने के लिए करीब 787 करोड़ रुपए दिए थे। लेकिन उनमें से सिर्फ 582 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए। बाकी बची हुई राशि का उपयोग ही नहीं हुआ। जिस वजह से कोरोना महामारी के दौरान जरूरी सुविधाओं की भारी कमी रही।
दूसरी तरफ, दिल्ली सरकार ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 52 करोड़ दिए थे। लेकिन उनमें से सिर्फ 30 करोड़ ही खर्च किए गए। इसके अलावा कोरोना की दवाई के लिए 119 करोड़ रुपए जारी किए गए थे। लेकिन खर्चा सिर्फ 83 करोड़ रुपए का हुआ।
सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी
सूत्रों की मानें तो CAG रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली सरकार ने 2016-17 से 2020-21 में अस्पतालों में 32,000 नए बेड लगाने का वादा किया था। लेकिन अभी तक इसकी संख्या 1,357 हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में बताया गया है राजधानी के कई ऐसे अस्पताल है, जहां बेड की भारी कमी देखी गई।
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