
Delhi News: एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) की अनलिस्टेड शेयरों से जुड़े एक बड़े ऑनलाइन फ्रॉड मामले में करीब 22करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है। इस मामले में पीड़ित परिवार ने जांच एजेंसियों पर लापरवाही, देरी और निष्पक्ष जांच न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ितों के अनुसार यह राशि विभिन्न निवेशकों से एनएसई के अनलिस्टेड शेयर दिलाने के नाम पर एकत्र की गई थी। यह धन स्वयं पीड़ित परिवार का नहीं, बल्कि उनके निवेशकों की मेहनत की कमाई थी, जिसे आरोपियों द्वारा धोखाधड़ी से हड़प लिया गया।मामले को हुए छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। लगातार शिकायतों और प्रयासों के बाद अंततः 21नवंबर को आरोपी स्नेह कीर्ति नागदा एवं कीर्ति नागदा के खिलाफ एफआईआर संख्या 140/25दर्ज की गई।
हालांकि एफआईआर दर्ज होने के दो महीने से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद भी जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। पीड़ितों का कहना है कि जांच न तो निष्पक्ष है और न ही पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ रही है।शिकायतकर्ता के अनुसार इस पूरे मामले के पीछे कई प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका सामने आ रही है। आरोप है कि वित्तीय अपराधों के इस नेटवर्क में शामिल मुख्य आरोपी पहले भी इसी तरह के मामलों में संलिप्त रहे हैं और उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं, लेकिन अपने रसूख के बल पर वे हर बार कार्रवाई से बच निकलते हैं।सबसे गंभीर बात यह है कि शिकायतकर्ताओं को अब तक उनकी एफआईआर की प्रति तक उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि यह कानूनन उनका अधिकार है।
पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पीड़ित मानने के बजाय उल्टा उन पर ही दबाव बनाया जा रहा है और ऐसा व्यवहार किया जा रहा है मानो वे ही आरोपी हों। साथ ही कुछ अनुचित आर्थिक अपेक्षाओं के संकेत भी दिए गए, जिन्हें पूरा करने से इनकार करने पर जांच को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।पीड़ितों ने विशेष रूप से आईएफएसओ द्वारका यूनिट पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके मामले में कोई सार्थक प्रगति नहीं हो रही है।
जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए
परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि निवेशकों का भारी दबाव लगातार बढ़ रहा है और यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे अत्यधिक मानसिक तनाव में हैं।पीड़ित अभिषेक सांगल ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर निवेशकों की राशि वापस दिलाई जाए तथा जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
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