कोरोना,मंकीपॉक्स और नोरोवायरस कौन-सा वायरस है ज्यादा खतरनाक, जानें लक्षण और बचाव

कोरोना,मंकीपॉक्स और नोरोवायरस कौन-सा वायरस है ज्यादा खतरनाक, जानें लक्षण और बचाव

नई दिल्ली: कोरोना ने जिस तरह दुनिया भर में तबाई मचाई है ये किसी से छिपा नहीं है लेकिन जिस तरह से देश-दुनिया में वायरसों का खतरा बढ़ रहा है ऐसा लग रहा है कि मानों ये वायरस आसानी से तो लोगों को छोड़ने वाला नहीं हैं। कोरोना के बाद ऑमिकॉनफिर टेमौटो फ्लू फिर मंकीपॉक्स और अब एक ने वायरस के मामलें सामने आए है वो है नोरोवायरस। हालांकि कोरोना और ऑमिकॉन को छोड़कर स्वास्थ्य विभाग की ओर से ये सारे वायरस जानलेवा नहीं है। वहीं आज हम आपको इस सभी वायरस के लक्षण और बचाव के बारें में बताएंगे। साथ ही हमारे लिए ये कितने खतरनाक है इससे भी अवगत करवाएंगे।

क्या है कोरोना वायरस

चीन के वीहान शहर से 2019 मे शुरू हुए वायरस का नाम कोरोनावायरस  है। इस वायरस से दुनिया भर में करोड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई दी है। यह एक श्वसन संक्रमण है। सांस का संक्रमण एक ऐसी बीमारी है जो नाक, गले, वायुमार्ग या फेफड़ों को प्रभावित करती है। कोविड-19 बहुत संक्रामक है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है। इसके लक्षण की बातें करें तो बुखार,थकान,सुखी-खांसी, नाक का बंध होना,बहती नाक, गले में खराश, सांस लेने में कठिनाई इत्यादि है। वहीं इसके  बचाव की बात करें तो हल्के लक्षण होते हैं और घर पर देखभाल की जा सकती है। लेकिन कुछ लोग बहुत बीमार हो सकते हैं और उन्हें अस्पताल में इलाज की आवश्यकता होती है। अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों के लिए, चिकित्सीय टीम उनके फेफड़ों की निगरानी और इलाज कर सकती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन बनी रहे। अधिक गंभीर मामलों में, रोगियों को सांस लेने में अधिक सहायता की आवश्यकता होती है, जैसे कि श्वसन ट्यूब या वेंटिलेटर।

क्या है मंकीपॉक्स

मंकीपॉक्स एक चिकनपॉक्स की तरह का वायरस है लेकिन इसमें अलग तरह का वायरल संक्रमण होता है। ये सबसे पहले साल 1958में कैद हुए एक बंदर में पाया गया था। साल 1970में ये पहली बार ये किसी इंसान में पाया गया। ये वायरस मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के वर्षा वन इलाकों में पाया जाता है।वहीं मंकीपॉक्स के लक्षण की बात करें तो मंक्सीपॉक्स के होने पर सपाट त्वचा का रंग बदलने लगता है। त्वचा पर लाल निशान और गांठें पड़ सकती हैं। सफेद पस से भरे फफोले शरीर पर पड़ सकते हैं जोकि चिकन पॉक्स की तरह दिखाई देते हैं।

संक्रमण की रफ्तार कम होने पर फफोले सूखने लगते हैं और 21दिन बाद खत्म हो जाते हैं।मंकीपॉक्स चेहरे से फैलना शुरू होता है। फिर बाहों, हाथों, पैरों और जननांग समेत शरीर के बाकी हिस्सों में फैलता है।मंकीपॉक्स के इलाज की बात करें तो मंकीपॉक्स के लिए वर्तमान में कोई विशिष्ट उपचार की सिफारिश नहीं की गई है। हालांकि चेचक के खिलाफ टीकाकरण रोग को रोकने में लगभग 85 प्रतिशत प्रभावी पाया गया है इसलिए, यह मंकीपॉक्स के गंभीर लक्षणों को रोकने के लिए बचपन में चेचक के टीकाकरण की सिफारिश करता है।

क्या है नोरो वायरस?

यह वायरस जानवरों से इंसानों में फैसले वाला वायरस है। यह वायरस गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी का कारण बनता है. इसमें पेट से जुड़ी बीमारियां सामने आती हैं। दूषित भोजन लेने के कारण लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं। चिंताजनक बात यह है कि ये वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैस सकता है। एक ही व्यक्ति एक से ज्यादा बार भी इसकी चपेट में आ सकता है। नोरो वायरस के लक्षण की बात करें तो पेट पर करता है अटैक। जिससे आंतों में सूजन आ जाती है। दस्त, उल्टी, पेट दर्द और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द भी देखने को मिलता है। सही इलाज मिलने के बाद 3 से  4 दिन में आप ठीक हो सकते हैं। कैसे करें बचाव?आपको बता दें कि यह वायरस जानलेवा नहीं है लेकिन इसकी दवा भी अभी तक मौजूद नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक पानी खूब पीना चाहिए। इसके साथ ही जानवरों के संपर्क में आने से भी बचना चाहिए। डॉक्टर नोरो वायरस से बचाव के लिए साबुन और गुनगुने पानी से हाथों को अच्छी तरह धोने की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा फ्रेश खाना खाएं और अगर बीमार महसूस कर रहे हैं।

 क्या है टोमैटो फ्लू

टोमैटो फ्लू एक रेयर वायरल बीमारी है। इससे संक्रमित होने पर शरीर पर लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं, स्किन में जलन होती है और डिहाइड्रेशन की समस्या आती है। इस बीमारी में शरीर पर लाल रंग के छाले जैसे बन जाते हैं, जो टमाटर जैसे दिखते हैं, इसलिए इसका नाम टोमैटो फ्लू पड़ा है। टोमैटो फ्लू के लक्षण की बता करें तो टोमैटो फ्लू में चिकनगुनिया जैसे लक्षण ही दिखाई दे रहे हैं इससे संक्रमित होने पर तेज बुखार, शरीर में दर्द, जोड़ों में सूजन और थकान होती है। हालांकि, इससे संक्रमित बच्चों में त्वचा में जलन और चकत्ते भी पड़ रहे हैं, जिससे शरीर के कुछ हिस्सों पर छाले पड़ जाते हैं। इससे संक्रमित होने पर पेट में ऐंठन, उल्टी या दस्त की शिकायत भी होती है।

इसके साथ ही हाथ और घुटनों के अलावा शरीर के कुछ हिस्सों का रंग भी बदल जाता है। इससे संक्रमित होने पर पेट में ऐंठन, उल्टी या दस्त की शिकायत भी होती है। स्वास्थ्य अधिकारी अभी भी टोमैटो फ्लू के सही कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे बचने के तरीका के लिए बता दें कि ये बीमारी नई है और अभी तक इसके बारे में ज्यादा जानकारी मौजूद नहीं है,  इसलिए इसका कोई पुख्ता इलाज नहीं है। संक्रमण से बचने के लिए अपने आसपास साफ-सफाई को बनाए रखें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। पानी पीते रहें। इसके अलावा अगर कोई भी लक्षण दिखता है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। अगर बच्चों में संक्रमण है तो उन्हें छालों को खुजाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बात और बिगड़ सकती है।

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