कोरोना की इस वैक्सीन के आगे फैल है अब तक की सभी वैक्सीन, जानें कैसे

कोरोना की इस वैक्सीन के आगे फैल है अब तक की सभी वैक्सीन, जानें  कैसे

नई दिल्ली: दुनिया में कोरोना की ऐसी लहर आई की देश में लोगों का खुले में सांस लेना ही मुश्किल हो गया। सभी देशों में लॉकडाउनलगा दिया गया। देशों की अर्थव्यस्था शून्य हो गई थी। कोरोना ने लोगों को घर में कैद कर दिया था। ऐसे में दुनिया में covid-19 के खिलाफ वैक्सीनेशन की शुरुआत हुई।

नए वेरिएंट के साथ-साथ वेक्सीनेशन में भी बदलाव हुए। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एंटीबॉडी की खोज की हैं, जिसमें दावा किया गया है SP1-77 सबसे असरदायक है। इसमें कोई भी नए तरह का कोरोना वेरिएंट आ जाए सब इसके सामने बेअसर है। बोस्टन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल और ड्यूक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक साथ चूहों पर किए इस अध्ययन के दौरान इसकी खोज की है। इस खोज का निष्कर्ष साइंस इम्यूनोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इसके मुताबिक, "SP1-77 स्पाइक प्रोटीन को एक ऐसी साइट पर बांधता है, जिसे अब तक किसी भी प्रकार से म्यूटेट नहीं किया गया है, और यह एक नोवल मैकनिज्म द्वारा इन रूपों को बेअसर करता है।" अध्ययन के सह-लेखक टॉमस किरचहॉसन, पीएचडी ने एक बयान में कहा, "ये गुण इसकी व्यापक और शक्तिशाली गतिविधि में योगदान कर सकते हैं." एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एंटीबॉडी तब बनने लगी थी जब शोधकर्ताओं ने एक माउस मॉडल को संशोधित किया था, जो मूल रूप से एचआईवी को व्यापक रूप से बेअसर करने वाले एंटीबॉडी की खोज के लिए बनाया गया था।

चूहों में अंदर मानव प्रतिरक्षा प्रणाली होती है, जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली से बेहतर एंटीबॉडी विकसित करने के तरीके की नकल करती है। जब हम एक बीमार इंसान के संपर्क में आते हैं, एंटीबॉडी, हालांकि टीके बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले अन्य एंटीबॉडी की तुलना में थोड़ा अलग तरीके से काम करती है। यह अध्ययन चूहों पर किया गया था इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसका क्या प्रभाव हो सकता है।

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