पूजा में नारियल का क्यों होता है इस्तेमाल? जानें इसका पौराणिक महत्व

पूजा में नारियल का क्यों होता है इस्तेमाल? जानें इसका पौराणिक महत्व

नई दिल्ली: देश दुनिया में इन दिनों त्योहारों का जश्न मनाया जा रहा है। फिलहाल देश में नवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है। देवी की आराधना के लिए जगह-जगह पंडाल में पूजा की जा रही है। नवरात्रि के नौ दिनों में लोग अपने दोस्तों परिवारों के साथ देवी की पूजा अर्चना कर रहे है। दरअसल हिन्दू धर्म में हर दिन कोई न कोई व्रत या त्योहार होता है। ऐसे में पूजा-पाठ में प्रयोग होने वाली चीजों का अपना खास महत्व होता है। फिर चाहे वो रोली हो या कलावा, नारियल भी उन्हीं चीजों में से एक है जिसे हरेक पूजा-पाठ में प्रयोग किया जाता है। हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की मूर्ति के सामने या किसी नवीन कार्य को शुरू करने से पूर्व नारियल फोड़ने की परंपरा है। शादी-विवाह हो, त्यौहार हो, पूजा हो, कोई नया कार्य आरंभ करना हो, वाहन खरीदा हो इन सभी कार्यों में नारियल बहुत महत्वपूर्ण होता है।

नारियल का पौराणिक महत्व

मान्यता है कि विष्णु भगवान और मां लक्ष्मी, नारियल का वृक्ष और कामधेनु को पृथ्वी पर ले आए थे। नारियल के पेड़ को कल्पवृक्ष भी कहा जाता है। भगवान शिव को भी नारियल बहुत प्रिय है। नारियल पर बनी तीन आंखों की तुलना शिवजी के त्रिनेत्र से की जाती है इसलिए नारियल को शुभ माना जाता है।

पूजा से पहले क्यों फोड़ा जाता है नारियल

किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले नारियल फोड़ा जाता है। माना जाता है कि नारियल के बाहरी हिस्से को घमंड का प्रतीक माना जाता है और अंदर के हिस्से को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा नारियल तोड़ने से किसी तरह की परेशानी नहीं आती है, बल्कि सफलता और बरकत मिलती है।

महिलाएं नारियल क्यों नहीं तोड़ती हैं

नारियल एक बीज फल है। स्त्री बीज रूप में ही संतान को जन्म देती है। इसलिए गर्भाधान संबंधी इच्छित मनोकामना पूरी करने में नारियल को सक्षम माना गया है। यही कारण है कि स्त्रियों के लिए नारियल को फोड़ना वर्जित माना जाता है। माना जाता है कि यदि स्त्री नारियल तोड़ती है तो उसकी संतान को कष्ट होता है।

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