Census 2027: दो चरणों में होगी जनगणना, जाति गणना और महिला आरक्षण पर पड़ेगा बड़ा असर

Census 2027:  दो चरणों  में होगी  जनगणना, जाति गणना और महिला आरक्षण पर पड़ेगा बड़ा असर

Census 2027: भारत में होने वाली जनगणना को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। इस बार जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी, जो देश की राजनीति, आरक्षण और विकास योजनाओं पर बड़ा असर डाल सकती है। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगा, जिसमें घरों और उनकी सुविधाओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसे हाउस लिस्टिंग चरण कहा जाता है। वहीं दूसरा चरण 9 फरवरी 2027 से शुरू होकर महीने के अंत तक चलेगा, जिसमें लोगों की गिनती होगी।

क्या है खास बात?

सरकार के मुताबिक, कुछ राज्यों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जनगणना का दूसरा चरण पहले ही अक्टूबर 2026 में कराया जाएगा। इस बार की सबसे खास बात यह है कि इसमें जातियों की गणना भी की जा सकती है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। जनगणना के आंकड़ों का सीधा असर महिला आरक्षण कानून पर भी पड़ेगा। संसद में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है, लेकिन इसे लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है। इसके बाद संसद और विधानसभा में महिलाओं की संख्या काफी बढ़ सकती है।

बढ़ सकता है प्रतिनिधित्व

हालांकि, परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में चिंता भी है। उनका मानना है कि अगर 2027 की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा हुआ, तो उत्तर भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है और उनका कम हो सकता है। इसी कारण कुछ राज्य 1971 की जनगणना को आधार बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।

ओबीसी को हो सकता है फायदा

जाति जनगणना को लेकर भी बहस तेज है। इससे खासतौर पर ओबीसी वर्ग को फायदा हो सकता है, क्योंकि उनकी सही आबादी का आंकड़ा सामने आएगा। इसके बाद वे अपने आरक्षण और योजनाओं में बढ़ोतरी की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा, जनगणना से शहरों और गांवों की असली स्थिति का पता चलेगा, जिससे सरकार बेहतर विकास योजनाएं बना सकेगी। कुल मिलाकर, 2027 की जनगणना देश के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।

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