
RE-Invest 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के गांधीनगर जिले में चौथे वैश्विक अक्षय ऊर्जा निवेशक सम्मेलन (री-इन्वेस्ट) 2024का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन का आयोजन भारत के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा किया गया है और इसमें सरकार, उद्योग और वित्तीय क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्तियों की भागीदारी की उम्मीद है।
पीएम मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता और इसके वैश्विक महत्व को उजागर किया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता, पैमाने, क्षमता और प्रदर्शन अद्वितीय हैं, और दुनिया भी इसे समझ रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत 21वीं सदी का सबसे अच्छा दांव है।
10,000 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद
तीन दिवसीय इस सम्मेलन में 10,000से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की, जिन्होंने भारत को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि भारत न केवल दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, बल्कि सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भी है। पीएम मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए अक्षय ऊर्जा को प्रोत्साहन देने के प्रयासों की सराहना की गई। उनके नेतृत्व में, गुजरात ने हरित ऊर्जा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है।
गुजरात की अक्षय ऊर्जा में अग्रणी भूमिका
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पीएम मोदी के नेतृत्व में गुजरात की अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुजरात की अक्षय ऊर्जा नीति और हरित हाइड्रोजन नीति राज्य सरकार की हरित भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वर्तमान में गुजरात में अक्षय ऊर्जा की स्थापित क्षमता 50,000मेगावाट से अधिक है, जो राज्य की ऊर्जा क्षमता का 54प्रतिशत है। राज्य सौर ऊर्जा की स्थापना में देश में सबसे आगे है।
वैश्विक भागीदारों की सक्रिय भागीदारी
'री-इन्वेस्ट 2024' का मुख्य विषय 'मिशन 500 GW' है, जो 2030तक भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता के महत्वूपर्ण विस्तार की योजना को दर्शाता है। भारत, जो वैश्विक अक्षय ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है, इस सम्मेलन के माध्यम से ऊर्जा संक्रमण में अपने वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है। इस वर्ष के सम्मेलन में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय भागीदारों में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, जर्मनी और नॉर्वे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे भारतीय राज्य भी इसमें भाग लेंगे। अमेरिका, यूके, बेल्जियम, यूरोपीय संघ, ओमान, यूएई, सिंगापुर और हांगकांग के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इसमें शामिल होंगे, जिनमें से कुछ का नेतृत्व जर्मनी और डेनमार्क के मंत्री करेंगे।
इस सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक अक्षय ऊर्जा निवेश को बढ़ावा देना और भारत को इस क्षेत्र में एक प्रमुख भूमिका में स्थापित करना है।
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