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"अगर ओवैसी वाकई बीजेपी को हराना चाहते हैं तो...", बिहार चुनावों के बीच AIMIM की INDIA महागठबंधन में नो एंट्री

"अगर ओवैसी वाकई बीजेपी को हराना चाहते हैं तो...", बिहार चुनावों के बीच AIMIM की INDIA महागठबंधन में नो एंट्री

Bihar Election: बिहार चुनावों को लेकर एकबार फिर सुर्खियों का बाजार गर्म है। असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को महागठबंधन में शामिल होने की उम्मीद थी, राष्ट्रीय जनता दल ने साफ कर दिया है कि वह ओवैसी की पार्टी को बिहार विधानसभा चुनाव में कोई सीट नहीं देगी। RJD के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि अगर ओवैसी वाकई बीजेपी को हराना चाहते हैं, तो उन्हें बिहार में चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। यह बयान न केवल ओवैसी की रणनीति को झटका देता है, बल्कि बिहार की सेक्युलर राजनीति में एक नया मोड़ भी लाता है। 

सेक्युलर वोटों का बिखराव रोकने की रणनीति-RJD

RJD की यह रणनीति सेक्युलरवोटों को एकजुट रखने की कोशिश का हिस्सा है। मनोज झा ने पटना में पत्रकारों से कहा कि ओवैसी का आधार हैदराबाद में है और बिहार में उनकी मौजूदगी से वोटों का बंटवारा हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि बीजेपी और उसकी नफरत की राजनीति को हराने के लिए ओवैसी को बिहार में चुनाव से दूर रहना चाहिए। झा ने कहा, “कभी-कभी चुनाव न लड़ना भी मदद करना होता है।” यह बयान स्पष्ट करता है कि RJD, कांग्रेस, लेफ्ट और मुकेश सहनी की VIP के साथ पहले से ही सीट बंटवारे में उलझा हुआ है और इसमें AIMIM की कोई जगह नहीं हैं।

 AIMIM की कोशिशें नाकाम

AIMIM के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल ईमान कई हफ्तों से महागठबंधन में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने लालू यादव को पत्र लिखकर गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी और कहा था कि उनकी पार्टी कम सीटों पर भी चुनाव लड़ने को तैयार है। हालांकि, उन्हें महागठबंधन की ओर से कोई पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिला। जब घोषणा पत्र की बैठक में AIMIM को नहीं बुलाया गया, तो ईमान ने तीसरा मोर्चा बनाने की बात कही थी। लेकिन दो दिन बाद उन्होंने फिर से लालू को पत्र लिखकर एक और कोशिश की, जो अब नाकाम होती दिख रही है। 

ओवैसी की जीत पर RJD की नजर

2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट बनाकर 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सीमांचल के तीन जिलों में 5 सीटें जीती थीं। लेकिन बाद में RJD ने चतुराई दिखाते हुए AIMIM के चार विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था। अब तेजस्वी और लालू की रणनीति साफ है कि वे AIMIM को गठबंधन में शामिल करने के बजाय सेक्युलर वोटों को एकजुट रखना चाहते हैं, ताकि बीजेपी को हराने की उनकी मुहिम को कोई नुकसान न पहुंचे।

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