
नई दिल्ली: भारत में छोटी बड़ी सारी नदियों को मिलाकर करीब 200 से भी ज़्यादा नदियां यहां बेहती हैं। यहां हर नदियों कि आपनी एक अलग कहानी और मान्यता हैं। इतनी सारी नदियों में से कुछ नदियां ऐसी है जो यहां के लोगों के लिए एक अलग ही महत्व रखती हैं। इन नदियों में से कुछ नदियां पूजा-अर्चना से जुड़ी हुई हैं। लेकिन आज हम आपको बताने वाले है कि आखिर क्यों कोसी नदीं को बिहार का शोक नदी कहा जाता है।
ऐसा कहा जाता है कि नदियों से जल है और जल से जीवन, लेकिन क्या हो जब यही जल आपके अंत का कारण बन जाए? वहीं हमारे देश में एक ऐसा भी राज्य मौजूद है जहां सदियों से एक नदी का कहर जारी है, हर साल बारिश के मौसम में कई जिन्दगियां इनकी तेज धाराओं के साथ बह कर खतम हो जाती है। बता दें कि, इस नदी का नाम कोसी है जो नेपाल में हिमालय से निकलते हुए बिहर में भीम नगर के रास्ते से भारत प्रज्वल में दाखिल होती है। इस के साथ ही मानसून के समय विभिन्न नदियों के चलो को सम्मिलित कर के धाराप्रवाह से बिहार में घुसती है जिससे वह अपार पानी अधिक हो जाने से बाढ़ की स्थिति आ जाती है। इस भीषण बाढ़ से कई जिन्दगियां तबाह हो जाती है।
कोसी नदी की बहुचर्चीत कथा
इस के साथ ही कोसी नदी को शापित नदी कहा जाता है जिसके पिछे एक चर्चीत कथा मशहूर है। इस कहानी के अनुसार कहते है कि कोसी, रामगंगा, भागीरथी, सरयू, काली गंगा, गोरी गंगा, यमुना कुल साथ बहने थी। एक बार इन सभी बहनों ने कही बाहर जाने की योजना बनाई लेकिन 6 बहने समय पर नही पहुंच सकी जिसके बाद कोसी ने गुस्से में श्राप दे दिया कि वो हमेशा अलग थलग बहेंगी और उसे कभी भी पवित्र नदी नही माना जायेगा
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