
Rape Case Against Kartik Maharaj: आजकल पूजा-पाठ के नाम पर धर्म को केवल कमाई का जरिया बना लिया गया है। लोग धर्म की आड़ में न जाने कितने अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसा ही एक मानवता को शर्मसार करने वाला मामला फिर से सुर्खियों में है। खबर है कि भारत सेवाश्रम से जुड़े पद्मश्री सम्मानित कार्तिक महाराज पर एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने दावा किया है कि कार्तिक महाराज ने नौकरी का लालच देकर पहले उसे ठगा और फिर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुर्शिदाबाद जिले के नबग्राम थाने में कार्तिक महाराज के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, और पुलिस प्रशासन जांच में जुट गया है।
क्या है बाबा खिलाफ आरोपों की पूरी कहानी ?
शिकायतकर्ता महिला ने अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए मीडिया से बातचीत में बताया कि 2013में कार्तिक महाराज ने उसे मुर्शिदाबाद के एक आश्रम में स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की नौकरी दिलाने का लालच दिया। उसे शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया और आश्रम परिसर में रहने के लिए एक कमरा भी दिया गया। महिला ने आरोप लगाया कि एक रात कार्तिक महाराज अचानक उसके कमरे में आए और शारीरिक संबंध बनाने का प्रस्ताव रखा। जब उसने विरोध किया, तो कथित तौर पर मानसिक दबाव और डर दिखाकर उसे मजबूर किया गया।
मामले को लेकर पुलिस का बयान
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, नबग्राम थाना में भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्तिक महाराज के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया गया है। बता दें, आरोपी भारत सेवाश्रम संघ के बेलडांगा स्थित मठ से जुड़े हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और पीड़िता का बयान दर्ज किया जा चुका है। मेडिकल जांच के साथ अन्य सभी कानूनी प्रक्रियाएं भी अपनाई जा रही हैं।
भारतीय जनता पार्टी के करीबी माने जाते है कार्तिक महाराज
कार्तिक महाराज ने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि एक सन्यासी के रूप में उनके मार्ग में इस तरह की बाधाएं आती रहती हैं, और वे न्यायपालिका का सम्मान करते हुए अपने वकीलों के माध्यम से कानूनी रूप से मामले का सामना करेंगे। इस मामले को और जटिल बनाता है उनका कथित राजनीतिक जुड़ाव, क्योंकि उन्हें भारतीय जनता पार्टी का करीबी माना जाता है, और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले भी उन पर चुनावों के दौरान भाजपा का समर्थन करने का आरोप लगा चुकी हैं। इसलिए, इस प्रकरण को न केवल कानूनी, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। अभी तक भारत सेवाश्रम संघ की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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