
Congress CWC Meeting: देशभर में इस वक्त संभल और अजमेर शरीफ का मुद्दा गरमाया हुआ है। हिन्दू पक्ष का दावा है कि संभल की मस्जिद में हरिहर मंदिर के पाए जाने के सबूत हैं। वहीं, अजमेर शरीफ में भगवान शिव के मदिर होने का दावा किया गया है। हालांकि, ये दोनों मामला अब कोर्ट में चला गया है। संभल की मस्जिद का सर्वे हो गया है। वहीं, अजमेर शरीफ के सर्वे होने पर फैसला नहीं हुआ है।
इस सब के बीच कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा ही लेकिन लगे हाथ पूर्व चीफ जस्टिस को भी निशाने पर ले लिया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि अफसोस की बात है कि 20 मई 2022 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने कुछ मौखिक अवलोकन किया। उससे एक खिड़की खुल गई।
क्या कहा जयराम रमेश ने?
जयराम रमेश ने कहा कि 1991 पूजा अधिनियम कानून लागू करवाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सामने आए विभिन्न विवाद जैसे की संभल में एक मस्जिद और अजमेर मे सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर दावा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। जयराम रमेश ने कहा कि इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी जयराम रमेश ने संभल और अजमेर विवाद को उठाया था।
संजय राउत ने भी दिया था बयान
बता दें कि, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने हार का ठीकरा पूर्व मुख्य जस्टिस के सिर फोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा था कि जस्टिस चंद्रचूड़ ने विधायकों की अयोग्यता पर याचिकाओं पर फैसला न करके कानून का डर खत्म कर दिया। साथ ही दलबदल के दरवाजे खोल दिए। उन्होंने कहा था कि अगर पूर्व चीफ जस्टिस समय रहते फैसला दे दिया होता तो चुनाव नतीजे अलग होते। संजय राउत ने विवादित बयान देते हुए कहा कि इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा और उनका नाम काली स्याही से लिखा जाएगा।
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