Derogetry Sologan In JNU: दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के बाद अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में भी दीवारों पर लिखे नारों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जेएनयू परिसर में ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘लॉन्ग लिव नक्सलबाड़ी’ जैसे नारे लिखे मिलने के बाद छात्र संगठनों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
दीवारों पर लिखे नारों से गरमाया माहौल
रिपोर्टों के मुताबिक, शनिवार, 24 अक्टूबर को जेएनयू परिसर की दीवारों पर विवादित नारे लिखे होने का मामला सामने आया। इन नारों में उमर खालिद की रिहाई की मांग और नक्सलबाड़ी के समर्थन में लिखावट शामिल बताई गई है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक और वैचारिक टकराव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
ABVP ने इन नारों पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि इस तरह की गतिविधियों से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो सकता है। संगठन ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
सावरकर की तस्वीर के पास आपत्तिजनक लिखावट का भी आरोप
ABVP की जेएनयू इकाई ने यह भी आरोप लगाया है कि परिसर में वीर सावरकर की तस्वीर के पास आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखी गईं। संगठन ने इस मामले में वामपंथी छात्र संगठनों पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और लिखावट करने वालों की पहचान को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच में यह पता लगाया जाना बाकी है कि दीवारों पर नारे किसने लिखे और इस घटना के पीछे क्या कारण थे।
जामिया में भी सामने आया था ऐसा मामला
जेएनयू से पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की दीवारों पर भी ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे मिलने की खबर सामने आई थी। जामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। इसी बीच दीवारों पर लिखे नारों ने विवाद को और बढ़ा दिया।
जामिया की घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थीं। अब जेएनयू में इसी तरह की लिखावट मिलने से दिल्ली के दोनों प्रमुख विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति और परिसर के माहौल को लेकर बहस तेज हो गई है।
प्रशासन की जांच पर टिकी नजरें
जेएनयू प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि विवादित नारे लिखने के लिए कौन जिम्मेदार है और जांच पूरी होने के बाद प्रशासन क्या कदम उठाएगा।
अब सबकी नजरें विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस घटना में कौन शामिल था और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
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