
Supreme Court Lashesh Out On Tamilnadu Minister: डीएमके नेता वी सेंथिल बालाजी को कैश-फॉर-जॉब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत मिलने के कुछ दिनों बाद तमिलनाडु सरकार में मंत्री बनाए जाने पर उच्चतम न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त की है। सोमवार यानी 2दिसंबर को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों पर दबाव बनाने की आशंका जताने वाली याचिका पर सुनवाई की सहमति दे दी। हालांकि, जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने बालाजी को जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के 26सितंबर के आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है।
सेंथिल बालाजी की मुश्किलें बढ़ेंगी
सेंथिल बालाजी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी अदालत में पेश हुए। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि हमने आपको जमानत दी और कुछ दिनों बाद आप कर्नाटक सरकरा में मंत्री बन गए। कोई भी व्यक्ति ये सोच सकता है कि अब वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के रूप में गवाहों पर दबाव होगा। ये क्या हो रहा है?' न्यायमूर्ति ओका ने आगे कहा कि अदालत जमानत के फैसले पर कोई नोटिस जारी नहीं करेगी लेकिन, इस पर सुनवाई होगी कि क्या अब गवाहों पर दबाव होगा। पीठ ने इस मामले पर सुनवाई के लिए 13दिसंबर की तारीख तय कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट से मिली थी जमानत
बता दें कि कैश फॉर जॉब घोटाले के शिकायतकर्ताओं में से एक के विद्या कुमार ने ताजा याचिका दायर की है और इस बात को उठाया कि जमानत मिलने के तुरंत बाद बालाजी को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। उच्चतम अदालत ने बीते 26सितंबर को ही डीएमके के नेता सेंथिल बालाजी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दी थी। वहीं, बेल मिलने के तुरंत बाद 29सितंबर को सेंथिल बालाजी को फिर से डीएमके सरकार में कैबिनेट मंत्री बना दिया गया था।
सेंथिल बाला जी पर क्या आरोप?
तमिलनाडु की करूर सीट से विधायक सेंथिल बालाजी को बीते साल 14 जून को ईडी ने अरेस्ट किया था। बालाजी पर साल 2011 से 2015 के बीच एआईएडीएमके सरकार में परिवहन मंत्री रहने के दौरान पैसे लेकर लोगों को नौकरी देने का आरोप लगा था। ईडी ने इस मामले में बालाजी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया था।
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