ग्लेशियर से निकल रहा है खून का झरना, वैज्ञानिकों ने बताई वजह

ग्लेशियर से निकल रहा है खून का झरना, वैज्ञानिकों ने बताई वजह

नई दिल्ली:बचपन से ही हम सुनते आ रहे है कि ग्लेशियर पिघल रहा है और इसके पिघले से धरतीवासियों को काफी नुकसान हो रहा है। लेकिन क्या आपने ऐसे टेलर ग्लेशियर के बारे में सुना जिसमें से खून की नदी बह रही हो। जी हां  अंटार्कटिका में एक ऐसा ग्लेशियर है जहां सालों से खून का पानी बह रहा है। हालांकि इसके पीछे की वजह वैज्ञानिकों ने ढूंढ ली है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस टेलर ग्लेशियर के नीचे जीवन पनप रहा है।

खून के झरना का खुला राज

बताया जा रहा है कि सालों से अंटार्कटिका के ग्लेशियर पर खून का झरना बहता आ रहा है। वहीं जब वैज्ञानिकों को इसका पता चला तो लग गए इसका राज खोलने में। जो अब जाकर खुला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि टेलर ग्लेशियर के नीचे एक बेहद प्राचीन जगह है। जहां एक जीवन पनप रहा है। वैज्ञानिकों ने बताया कि गेल्श्यिर के नीचे लौह नमक  मौजूद है। लौह नमक एक फेरिक हाइड्रोक्साइड। इस ग्लेशियर के नीचे सूक्ष्मजीव होने की जानकारी मिली। इसके कारण ग्लेशियर से खून का झरना निकल रहा है।

सबसे पहले किसने की झरने की खोज

बता दें कि ब्रिटिश खोजकर्ता थॉमस ग्रिफिथ टेलर  ने सबसे पहले पूर्वी अंटार्कटिका के विक्टोरिया लैंड पर टेलर ग्लेशियर के झरने की खोज साल 1911 में की थी। यूरोपियन वैज्ञानिक अंटार्कटिका के इस क्षेत्र में सबसे पहले पहुंचे थे। ब्रिटिश खोजकर्ता थॉमस और उनके साथियों ने इस लाल रंग को एल्गी समझा था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं था जिसके बाद इस मान्यता को रद्द कर दिया गया। इस जगह पर तापमान दिन में माइनस सात डिग्री सेल्सियस रहता है और खून का झरना बेहद ठंडा है। यह नमक की वजह से जमता नहीं है और बहता रहता है।

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