दिव्यांगों को घर के पास खेलने की सुविधा मिले : दीपा मलिक

दिव्यांगों को घर के पास खेलने की सुविधा मिले : दीपा मलिक

गुड़गांव : रियो पैरालंपिक में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली दीपा मलिक का सफर अभी थमा नहीं है। वह युवा दिव्यांगों के लिए काम करना चाहतीं हैं। उनका कहना है कि दिव्यांगों के पास शिक्षा व खेल में अवसर बराबर होने चाहिए। अगर ऐसा होता है तो दिव्यांग युवा दुनिया में देश का नाम रोशन करेंगे। हालांकि देश में दिव्यांगों के लिए धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। दीपा ने कहा कि जो भी दिव्यांग अपने को कमजोर समझ लेता है, कामयाबी उससे दूरी बना लेती है।

जिंदगी सभी को आगे बढ़ने का मौका देती है। दीपा अपने संघर्ष पर ज्यादा बात करना नहीं चाहतीं। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश, रियो में पदक के बाद कोई और ख्वाहिश? मैं एक ऐसी अकादमी स्थापित करना चाहती हूं, जिसमें स्कूल, खेल अभ्यास और रहने की सुविधा हो। कहीं पर भी खेलने व जाने के लिए बस की सुविधा हो। क्योंकि, दिव्यांग लड़कियों के लिए यह बड़ी परेशानी है। देश में अभी दिव्यांग लड़कियों के लिए कोई सुविधा नहीं है।

आप स्वयं खेलना जारी रखेंगी? जी, अभी मैं देश के लिए और पदक जीतना चाहती हूं। मैंने अपना अभ्यास शुरू कर दिया है। साक्षी के बाद आप भी हरियाणा की अकेली खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ओलंपिक पदक जीता? रियो जाने से पहले मुझ पर दबाव था।

जब मेरे पति के गांव के पहलवान योगेश्वर दत्त पदक से चूक गए, तो गांव भैसवाल की पंचायत ने कहा था कि गांव का बेटा पदक से चूक गया तो क्या हुआ, अभी गांव की बहू पदक की दौड़ में है। पंचायत के शब्द मेरे कानों में हमेशा गूंजते रहे। जब मैं पदक जीतने में कामयाब रही तो मैंने राहत की सांस ली कि मैं पंचायत की आशा को पूरा कर सकी। जूनियर कोच का पद उच्च अधिकारी पद में तब्दील होगा?

मंत्री जी ने आश्वासन दिया है। नियमों के अनुसार मुझे भी पद मिलेगा। रियो पैरालंपिक में भारत को चार पदक मिले हैं। क्या अब पैरा खिलाड़ियों की स्थिति सुधरेगी? देखिए, राष्ट्रीय स्तर पर सुविधा मिल रही है, लेकिन देश में जिला स्तर पर काम करने की जरूरत है। ताकि छोटे से छोटे स्तर पर दिव्यांग खिलाड़ी को घर-गांव के पास खेलने की सुविधा मिल सके। राष्ट्रीय स्तर पर सुविधाओं को लेकर कई बार आपकी मांग रही है?

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