सिंधु और साक्षी ने रियो ओलिंपिक में बचाई भारत की लाज

सिंधु और साक्षी ने रियो ओलिंपिक में बचाई भारत की लाज

नई दिल्ली : सवा अरब भारतीयों की उम्मीदों को लेकर रियो ओलिंपिक में गए 117 खिलाड़ी सिर्फ दो पदक हासिल कर पाए। अब चार साल बाद खिलाड़ियों का मेला 2020 में जापान की राजधानी टोक्यो में लगेगा।

रियो में अपने सबसे बड़े दल के साथ उतरे भारत को कई खिलाड़ियों से उम्मीद थी। लेकिन अभिनव बिंद्रा, साइना नेहवाल, सानिया मिर्जा और लिएंडर पेस जैसे दिग्गज कुछ नहीं कर पाए। भारत को बेटियों की बदौलत जो दो पदक मिले उनमें से कांस्य का पहला पदक पहलवान साक्षी मलिक ने दिलाया, तो दूसरा रजत के रूप में पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में जीता। अंतिम दिन आखिरी उम्मीद पहलवान योगेश्वर दत्त से थी, लेकिन 65 किलो भारवर्ग के क्वालीफाइंग राउंड में ही हारकर बाहर हो गए। इस तरह भारत 207 देशों के बीच 67वें स्थान पर रहा।

अमेरिका की बादशाहत : अमेरिका 45 स्वर्ण सहित कुल 120 पदक जीतकर शीर्ष पर रहा तो ब्रिटेन 27 स्वर्ण सहित 66 पदकों के साथ दूसरे और चीन 26 पीले तमगों सहित 70 पदक लेकर तीसरे स्थान पर रहा।

पहले पदक की साक्षी : पहलवान साक्षी भारत के पहले पदक की साक्षी बनीं। उन्होंने आठ घंटे में पांच बाउट खेलकर कांस्य पदक जीता। क्वार्टर फाइनल में हारने के बाद उन्होंने रेपचेज में अपने दोनों मुकाबले जीतकर देशवासियों को खुश होने का मौका दिया।

सिंधु की चांदी : साक्षी के बाद शटलर पीवी सिंधु ने रजत पदक जीतकर जश्न को दोगुना कर दिया। वो भले ही फाइनल में दुनिया की नंबर एक शटलर स्पेन की कैरोलिन मारिन से हार गईं, लेकिन फाइनल तक के अपने सफर में दिग्गज खिलाड़ियों को धराशायी कर सिंधु ने सभी का दिल जीत लिया।

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