
तेहरान - हाल ही में लेबनान के आतंकवादी संगठन हिज्बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की इजरायली हमले में मौत हो गई है, जिसके बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को एक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है। यह कदम सुरक्षा चिंताओं के चलते उठाया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ अपनी अगली रणनीति को लेकर गंभीर है।
ईरान के सूत्रों ने बताया कि नसरल्लाह की हत्या की जानकारी मिलते ही खामेनेई ने अपने निवास पर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक बुलाई। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इस बैठक में ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने इस स्थिति की गंभीरता को समझा। इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने 27 सितंबर को एक लक्षित हवाई हमले में नसरल्लाह की मौत की पुष्टि की। इस हमले में हिज्बुल्लाह के दक्षिणी मोर्चे के कमांडर अली कार्की भी मारे गए थे। यह हमला दहिह क्षेत्र में हिज्बुल्लाह के केंद्रीय मुख्यालय पर किया गया, जो एक आवासीय इमारत के नीचे स्थित था।
इजरायल का 'न्यू ऑर्डर' अभियान
इजरायली सेना के अभियान का नाम 'न्यू ऑर्डर' रखा गया है, जिसमें नसरल्लाह को लक्षित किया गया था। आईडीएफ ने अपने बयान में कहा कि नसरल्लाह ने हिज्बुल्लाह के महासचिव के रूप में कई इजरायली नागरिकों और सैनिकों की हत्या की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। उनके नेतृत्व के दौरान आतंकवादी गतिविधियों में तेजी आई, जिससे उनकी हिम्मत को तोड़ने का यह कदम उठाया गया।
ईरान की सुरक्षा बैठक में संभावित खतरों पर चर्चा
ईरान के अधिकारियों ने इस बैठक को जल्दबाजी में बुलाया, यह मानते हुए कि हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर इजरायल की कार्रवाई नियंत्रण से बाहर हो सकती है और इसका असर ईरान पर भी पड़ सकता है। इस साल की शुरुआत में, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत हुई थी, जब उनका हेलिकॉप्टर अजरबैजान सीमा के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। रईसी को खामेनेई के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था, जिससे ईरान की सुरक्षा स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है।
इस प्रकार, नसरल्लाह की हत्या और उसके बाद की घटनाएं ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती प्रस्तुत करती हैं, और इसका क्षेत्रीय स्थिरता पर गहरा असर पड़ सकता है।
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