
Chinese Manufacturers Tiktok Trade War: चीन और अमेरिका के बीच चल रही टैरिफ वॉर अब सोशल मीडिया तक पहुंच गई है।चीन के कई फैक्ट्री मालिकों ने TikTok पर वीडियो पोस्ट कर अमेरिकी ग्राहकों से अपील की है, "हमसे सीधे सामान खरीदो और भारी टैक्स देने से बचो।"
बता दें कि, TikTok पर एक यूज़र Wang Sen ने खुद को लग्ज़री ब्रांड्स का असली निर्माता बताया। वह Birkin बैग्स के सामने खड़ा होकर कहता है कि "हमसे लो, दाम सुनकर यकीन नहीं होगा।" हालांकि, यह वीडियो बाद में TikTok से हटा दिया गया, लेकिन तब तक चीन के DHgate और Taobao जैसे शॉपिंग ऐप्स अमेरिका के ऐप स्टोर में टॉप पर पहुंच चुके थे।
क्या ये सप्लायर्स सच में असली सामान बेच रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि इन वीडियो में किए गए दावे पूरी तरह सही नहीं हैं। अक्सर बड़ी कंपनियां अपनी निर्माण इकाइयों (फैक्ट्रियों) से गोपनीयता अनुबंध करवाती हैं ताकि वे यह न बता सकें कि वे किस ब्रांड के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में ये TikTok वीडियो केवल लोगों को सस्ते चाहे नकली ही क्यों न हों प्रोडक्ट्स की ओर आकर्षित करने के लिए बनाए गए हैं।
Lululemon ने झूठे दावे पर दी प्रतिक्रिया
एक वायरल वीडियो में दावा किया गया कि Lululemon कंपनी की 98डॉलर की पैंट यहां सिर्फ 5डॉलर में मिल रही है। वीडियो के वायरल होने के बाद कंपनी ने तुरंत स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “हम इस फैक्ट्री से कोई संबंध नहीं रखते। ग्राहक नकली प्रोडक्ट्स से सावधान रहें।”
आखिर क्या है बड़े ब्रांड्स का सच?
University of the Arts London की प्रोफेसर Regina Frei के अनुसार, कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड अपने प्रोडक्ट्स के कुछ हिस्से चीन में बनवाते हैं और फिर उन्हें इटली या फ्रांस में फाइनल रूप देते हैं।ऐसे में 'Made in Italy' का टैग लगा होता है।
अब सस्ते सामान पर भी टैक्स का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका जल्द ही एक नया नियम ला सकता है, जिसमें 800डॉलर से कम के पैकेट्स पर भी आयात टैक्स लगेगा। ऐसे में Temu और Aliexpress जैसे प्लेटफॉर्म से चीज़ें मंगवाना अब उतना सस्ता नहीं रहेगा। साथ ही, इन सामानों पर आमतौर पर न गारंटी मिलती है और कई बार न ही रिटर्न की सुविधा होती है।
सस्ते सामान से पर्यावरण को भी हो रहा है नुकसान
सस्ते प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। इन सामानों की पैकिंग, शिपिंग और डिलीवरी में भारी मात्रा में प्लास्टिक और ईंधन का उपयोग होता है, जिससे कचरा और प्रदूषण बढ़ता है।
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