
नई दिल्ली: देश इस समय कोरोना जैसी महामारी से दो चार हो रहा है. देश की अर्थव्यवस्था की कोरोना ने कमर भी तोड़ कर रख दी है. ऐसे में जहां, पूरा देश एक होकर कोरोना को गो-गो करने में लगा है तो वहीं, देश की राजनीति भी अपना रंग दिखा रही है. बता दें कि बीते दिनों महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की हत्या हुई थी. जिसके बाद इस मामले ने राजनीति का रंग ले लिया. देश में आक्रोश पैदा हो गया. हत्या करने वालों को कठोर से कठोर सजा दी जाए. जिसको लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी सीएम उद्धव ठाकरे से बातचीत की. दोषियों पर कठोर एक्शन लेने को कहा.
लेकिन, अब बात राजनीति करने की बारी महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे की थी. यूपी के बुलंदशहर में बीते दिन दो साधुओं की हत्या हो जाती है जिसके बाद सीएम योगी अपने पूरे एक्शन में आ जाते है. आला अधिकारियों को निर्देश देते है कि मौके पर जाकर पूरे मामले की जांच करो. जल्द से जल्द पूरे मामले की रिपोर्ट सौंपे. इसी लेकर महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने भी सीएम योगी के पास फोन किया और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की बात कही.
अब ऐसे में ऐसे वक्त में सवालों का सुलगना लाजमी है. भारत में राजनीति के लिए क्या साधुओं की हत्या का ही टॉपिक चाहिए था. देश को पहले साधुओं की हत्या को करने वाले को सजा नहीं देनी चाहिए थी. क्या इस समय एकजुट होकर कोरोना को हराना नहीं चाहिए था. जिससे देश को आगे ले जाने में मदद मिलती. लेकिन, हाल ही में साधुओं की हत्याओं ने पूरे देश की रानीति को सोचने पर मजबूर कर दिया. राजनीति ही नहीं बल्कि हर नागरिक का ध्यान इस ओर आकर्षित कर दिया. अब क्या अनेकता में एकता वाले देश में साधुओं की मौत पर ही राजनीति होगी.
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