
हरियाणा में विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले सियासी पार्टिंयों के नेताओं के बीच दल-बदल का खेल चल रहा है। बीजेपी के कांग्रेस ने भी इंडियन नेशनल लोकदल को बड़ा झटका दिया।
इनेलो के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के साथ कई बड़े नेताओं ने कांग्रेस में एंट्री ली खुद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की जानकारी दी, कांग्रेस ने भी अब इनेलो नेताओं को खुद से जोड़ लिया है। इनेलो नेताओं के अलावा कलायत से निर्दलीय विधायक जयप्रकाश भी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। आजाद ने कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं का पार्टी में स्वागत किया, और कहा कि सिर्फ कांग्रेस ही बीजेपी को हरा सकती है, इसलिए ये नेता कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के सियासी दलो की नीति और रीति हर रोज़ नया रूप और रंग बदल रही है। सत्तारूढ़ बीजेपी का चुनाव प्रचार भियान जहां अपने अंतिम चरण में है, तो वहीं दूसरे दलों के सियासी अभियान की शुरूआत होती नजर आ रही है। बीजेपी का लक्ष्य 75 प्लस है, तो वहीं विपक्षी दलों का मकसद खोई हुई सियासी जमीन और खिसकते जनाधार को वापस पाना कांग्रेस अपने कार्यकर्ता सम्मेलन को लेकर काफी उत्साहित है। इस जोश में उस वक्त और इजाफा हो गया जब पार्टी ने विरोधी दल इनेलो को बड़ा झटका दिया।
इनेलो के चार जाने माने चेहरे और नाम रविवारा को कांग्रेस के साथ जुड़ गए। इनेलो के कद्दावर नेता अशोक अरोड़ा के कांग्रेस में जाने को खासतौर पर इनेलो के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इन नई भर्तियों से कांग्रेस काफी उत्साहित नजर आ रही है। इसकी झलक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद की इस बात में साफ देखी जा सकती है, कि वो ये दावा कर रहे हैं बीजेपी का मुकाबला सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है। जिसका सबूत हैं कांग्रेस में शामिल होने वाले इनेलो के ये नेता इनेलो का सिमटता वजूद पार्टी नेताओं की चिंता को बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ जेजेपी एक अलग ही चक्रव्यूह में फंसी हुई हैं। खाप नेता रमेश दलाल को लेकर दिए गए बयान पर दुषयंत चौटाला खापों की नाराजगी का शिकार होते दिख रहे हैं, दिग्विजय चौटाला ने साफ कर दिया है कि दुष्यंत चौटाला खापों से माफी नहीं मांगेंगे, क्योंकि रमेश दलाल का अपमान खाप का अपमान नहीं है।
हम खाप का सम्मान करते हैं, इसके अलावा दिग्विजय ने आरोप लगाया कि खाप नेता रमेश दलाल चूंकि इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव हैं इसलिए वह इनेलो की भाषा बोल रहे हैं। इसके अलावा अशोक अरोड़ा पर गद्दारी करने वाले अभय चौटाला के बयान पर भी उन्होंने सवाल किया, कि अगर वो एक साल से पार्टी से गद्दारी कर रहे थे, तो फिर उन्हें उनको पार्टी से क्यों नहीं निकाला गया। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, और जब अशोक अरोड़ा पर विश्वास ही खत्म हो गया था तो फिर उन्हें, दुष्यंत, और अजय चौटाला को अशोक अरोड़ा के कहने पर पार्टी से क्यों निकाला गया। बकौल दिग्विजय इनेलो का कोई अस्तित्व नहीं बचा है इस लिए अभय चौटाला यू टर्न ले रहे हैं।
चुनावी बिसात पर पल पर सियासी दलों की चाल बदल रही है। लगातार चुनावी जीत से उत्साहित बीजेपी ने अपने लिए लक्षय 75 प्लस रखा है, तो कांग्रेस एक बार फिर सत्ता पाने के लिए जद्दोजहद कर रही है। जेजेपी के सामने अपने वजूद को स्थापित करने की चुनौती है, तो इनेलो के लिए खुद को जिंदा रखने की,हालांकि सभी विपक्षी दलों का यही दावा है कि सत्ता उन्हीं के हाथ आने वाली है। लेकिन किसकी उम्मीदें परवान चढ़ेंगी, ये तो वक्त ही बताएगा।
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