
हरियाणा में जैसे जैसे चुनावी वक्त नजदीक आ रहा है, वैसे वैसे सियासी दलों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। एक तरफ प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल जनता के बीच पहुंचकर जन आशीर्वाद ले रहे हैं, तो दूसरी तरफ बिखरा हुआ विपक्ष अपने वजूद को समेटने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि कांग्रेस में भले ही उसके शुभचिंतक उसकी चिंता बने हुए हों, लेकिन चौटाला परिवार को एक करने के लिए सर्वखाप शुभचिंतक के तौर पर सामने आई है...और परिवार को एक करने की कोशिश में जुटी है।
प्रदेश की फिजा इस वक्त भगवा रंग में रंगी है। चुनावी शोर और रैलियों के जोर में इस वक्त हर ओर हर दिशा बीजेपी ही दिखाई दे रही है। विपक्ष चुनावी हलचल से पूरी तरह गायब है, क्योंकि इस वक्त विपक्ष अपने ही वजूद को एकजुट करने में लगा है। लेकिन सियासी हवाएं अपना रुख बदलती हुई नजर आ रही है। हरियाणा की राजनीति जल्द किसी बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। क्योंकि चौटाला परिवार को एक बार फिर एकजुट करने की कोशिश शुरू हो गई है। हरियाणा की सर्वखाप पंचायत ने इंडियन नेशनल लोकदल और जननायक जनता पार्टी को एकजुट करने का बीड़ा उठाया है।
रविवार को हुई खाप की बैठक में फैसला किया गया कि अजय चौटाला और उनके बेटे दुष्यंत चौटाला का अभय चौटाला से जो विवाद है, उसे खत्म करवाकर परिवार को फिर एक साथ लाया जाएगा। अभय चौटाला ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाया, और कहा कि पंचायत का जो फैसला होगा, वह उन्हें मंजूर होगा। अभय चौटाला ने ये भी कहा कि बड़े भाई अजय चौटाला, जो कहेंगे वह उन्हें मंजूर होगा..इस मामले में दुष्यंत चौटाला तीन सितंबर को अपने पिता अजय चौटाला से बात करके खाप को अपना जवाब देंगे। और पांच सितंबर को खाप पंचायत इस बारे में अंतिम फैसला करेगी। खाप पंचायत ने दुष्यंत चौटाला को चार तारीख तक का समय दिया है। खाप नेता सुरेंद्र दहिया ने कहा कि अभय चौटाला ने खाप के फैसले पर सहमति जताई है। ऐसे में सियासी समीकरण बदलते हुए नजर आ रहें हैं।
सीएम मनोहर लाल की प्रदेश स्तरीय जन आशीर्वाद यात्रा अपने अंतिम चरण में प्रवेश करने को है। मुख्यमंत्री 90 में से 70 से ज्यादा विधानसभाओं में पहुंचकर जनता का आशीर्वाद ले चुके हैं। ऐसे में बिखराव के बाद अगर चौटाल परिवार एक होता भी है, तो क्या ये जनता के बीच अब भी उतना ही मजबूत होगा, जितना पहले था...अभी शायद कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी। लेकिन कहते हैं न पहले आओ पहले पाओ...FIRST IMRESSION IS THE LAST IMPRESSION...और शायद बीजेपी जनता पर ये छाप छोड़ छुकी है...ऐसे में विपक्ष के सामने एक नहीं कई चुनौतियां खड़ी हैं।
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