Kolkata Case: कौन हैं संदीप घोष? जो कई आरोप लगने के बाद भी बने रहें मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल

Kolkata Case: कौन हैं संदीप घोष? जो कई आरोप लगने के बाद भी बने रहें मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल

Who is Sandeep Ghosh: हत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को पूरे देश को रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल किया था। इस दौरान कोलकता से एक बड़ी खबर सामने आई है। डॉक्टरों के द्वारा पिछले कई दिनों से मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल संदीप घोष का इस्तीफा मांगा जा रहा था। लगातार चौतरफा विरोध के बाद आखिरकार संदीप घोष ने सोमवार क अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। संदीप घोष का विवादों से गहरा नाता रहा है। उनपर टेंडर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था लेकिन इसके बावजूद वो अपने पद पर बने रहे। इतना ही नहीं, मेडीकल कॉलेज की महिला डॉक्टरों ने संदीप घोष पर सुरक्षा मुहौया ना करवाने का भी आरोप लगाया हैं। बता दें, आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक रेजिडेंट महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार करके निर्ममता से हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन इसके बावजूद भी रेजिडेंट डॉक्टरों की ओर से पुलिस पर तथ्यों को छुपाने का इल्जाम लगाया जा रहा है।

कौन है संदीप घोष?

साल 2021 के मध्य में संदीप घोष को आरजी कर मेडिकल कॉलेज का प्रिसिंपल बनाया गया था। इससे पहले वो र्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज और नेशनल मेडिकल कॉलेजमें एमएसवीपी हुआ करते थे। संदीप घोष हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। हालांकि, संदीप घोष पहली बार विवादों में नहीं आए हैं। उनपर पिछले मार्ट में ही भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। नके खिलाफ टेंडरों में अनियमितता समेत भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे थे। उनके नाम पर ताला थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी लेकिन उनपर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। संदीप घोष पर आरजी कर मेडिकल कॉलेज का करोड़ों रुपए का कचरा तस्करी करवाकर बांग्लादेश भेजने का भी आरोप लगाया गया।  

भाजपा नेता भी संदीप घोष पर भड़के

बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि डॉ. संदीप घोष का प्रभाव इतना रहा है कि एक बार उन्हें हटाने के लिए एक सरकारी आदेश 48 घंटों के भीतर हा रद्द कर दिया गया था। दूसरी बार उन्हें हटाया गया और यहां से मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर कर दिया गया। हालांकि उन्हें एक महीने के अंदर ही फिर आरजी कर मेडिकल कॉलेज में वापसी कर ली। गौरतलब है किसुवेंदु अधिकारी ने मांग की था कि कम से कम अस्पताल परिसर के भीतर डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनकी विफलता के लिए उन्हें तुरंत निलंबित और उनके पद से हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना के बाद उनके भ्रामक बयान और लापरवाह रवैया पीड़ित के प्रति उनकी उदासीनता को उजागर करता है।

 

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