पलट गया मौसम का मिजाज...4 दशकों में मॉनसून का बदला पैटर्न, वेदर रिपोर्ट से खुले जलवायु परिवर्तन के राज

पलट गया मौसम का मिजाज...4 दशकों में मॉनसून का बदला पैटर्न, वेदर रिपोर्ट से खुले जलवायु परिवर्तन के राज

Monsoon Pattern Change: पिछले चार दशकों में भारत के मौसम में कई उतार-चढाव देखने को मिले। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, जो देश की अर्थव्यवस्था और जीवन का आधार है, अब पहले की तरह अनुमानित नहीं रहा। हाल के अध्ययनों और मौसम विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, मॉनसून का पैटर्न पश्चिम की ओर खिसक गया है, जिसकी वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम की अनिश्चितता बढ़ी है।

सीईईडब्ल्यू का अध्ययन

बता दें, हाल ही में काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के अध्ययन के अनुसार, पिछले दशक (2012-2022) में देश के 55% तहसीलों या उप-जिलों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वर्षा में 10% से ज्यादा की महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। दरअसल, मॉनसून भारत की जलवायु का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश की लगभग 70% वार्षिक वर्षा के लिए जिम्मेदार है। यह खेती, जल संसाधनों और अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है। हालांकि, हाल के दशकों में मॉनसून की गतिविधियों में बदलाव देखा गया है।

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, मॉनसून ट्रफ (कम दबाव का क्षेत्र) पहले की तुलना में अधिक बार पश्चिमी और मध्य भारत की ओर खिसक रहा है। पहले यह मुख्य रूप से पूर्वी और उत्तरी भारत में सक्रिय रहता था, लेकिन अब गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे पश्चिमी राज्यों में भारी बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं।

40 सालों में मौसम का बदलाव

मौसम विज्ञानियों ने बताया कि पिछले 40 सालों में भारत के मौसम में कई बदलाव देखे गए हैं, जो जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों से जुड़े हैं। पश्चिमी विक्षोभ, जो पहले सर्दियों में हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और उत्तरी मैदानों में बारिश लाता था, अब गर्मियों और मॉनसून के दौरान भी सक्रिय हो रहा है। मॉनसून का आगमन और वापसी अब पहले की तरह नियमित नहीं रहा। जहां पहले मॉनसून जून के मध्य तक देश के अधिकांश हिस्सों में पहुंच जाता था, अब यह कई बार देरी से आता है या जल्दी सक्रिय हो जाता है। 2025 में, मॉनसून ने मई के अंत तक ही मुंबई और दक्षिणी राज्यों में दस्तक दे दी, जो सामान्य से 8-10 दिन पहले था।

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