
Waqf Amendment Bill: संसद में आज यानी कि दो अप्रैल को वक्फ संशोधन बिल पेश होगा। वक्फ संशोधन बिल पर हंगामे के पूरे आसार जताए जा रहे हैं। यूं तो इस बिल पर चर्चा के लिए आठ घंटे का समय तय किया गया है लेकिन जरुरत महसूस होने पर चर्चा के समय को बढ़ाया जा सकता है। जहां केंद्र सरकार ने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है तो वहीं विपक्षी दलों के नेताओं ने भी विरोध के लिए अपनी कमर कस ली है। बता दें कि संयुक्त संसदीय समिति ने विपक्षी दलों की असहमति के बावजूद 300 पन्नों सहित 944 पन्नों की रिपोर्ट पेश कर दी है।
क्या है वक्फ?
धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए चल या अचल संपत्ति का स्थायी दान ही वक्फ कहलाता है जिसका प्रबंधन वक्फ अधिनियम, 1995 द्वारा शासित है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा वक्त में देश में 37.39 लाख एकड़ क्षेत्र में फैली 8.72 लाख पंजीकृत वक्फ संपत्तियां हैं। अहम ये है कि इनमें से सिर्फ 1,088 संपत्तियों ने ही वक्फ डॉक्यूमेंट रजिस्टर कराए हैं जबकि 9279 अन्यों के पास स्वामित्व अधिकार वाले डॉक्यूमेंट मौजूद हैं।
क्या है सरकार की योजना?
केंद्र सरकार ने अब वक्फ डॉक्यूमेंट्स को अनिवार्य कर दिया है और संपत्ति के सभी विवरणों को छह महीने के भीतर ही एक पोर्टल पर अपलोड करना भी जरूरी बना दिया है। कानून के मुताबिक, कलेक्टर के पद से ऊपर के अधिकारी द्वारा जांच भी किए जाने का प्रावधान है। जांच इस चीज की होगी कि वक्फ संपत्ति सरकारी है या नहीं। इस जांच का उद्देश्य अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचना है। इस बदलाव के बाद अब ट्रिब्यूनल के फैसले अंतिम नहीं रह जाएंगे यानी कि 90 दिनों के अंदर हाईकोर्ट में अपील दायर करने का प्रावधान है और जिला कलेक्टरों द्वारा पंजीकरण आवेदनों की वास्तविकता की पुष्टि की जाएगी। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो महिलाओं को भी रखना होगा। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश वक्फ बोर्ड में बोहरा और अघाखानी समुदाय के एक-एक व्यक्ति को भी जगह देनी होगी। अहम ये है कि अब पिछड़े वर्गों से संबंधित मुस्लिम भी बोर्ड का हिस्सा बनेंगे और उसमें दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी जगह देनी होगी।
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